जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल को देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय के तौर पर बदलने पर फैसला 26 जुलाई को हो सकता है। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार ने किया है लेकिन नेहरू संग्रहालय एवं पुस्तकालय संचालन कमेटी में शामिल कांग्रेस के सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं। 26 सदस्यीय कमेटी में ज्यादातर सदस्य कांग्रेस के हैं। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने की संभावना है।
कांग्रेस सदस्यों का कहना है कि यह सीधे तौर पर नेहरू की विरासत पर हमला है, इसलिए वे इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं देंगे। 10 हजार स्क्वॉयर फीट में बनने वाले संग्रहालय में पूर्व प्रधानमंत्रियों के लोकतंत्र में योगदान और उनके राजनीतिक सफर को वर्चुअल तकनीक की मदद से प्रस्तुत किया जाएगा।
इस समय दिल्ली में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की यादों को संग्रहीत किया गया है। इस संग्रहालय के बनने से चौधरी चरण सिंह, आई के गुजराल, चंद्रशेखर समेत सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का भारतीय राजनीति में स्थान और योगदान एक छत के नीचे दिखेगा।
जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल के निदेशक शक्ति सिन्हा का कहना है कि देश को बनाने में पूर्व प्रधानमंत्रियों का अभूतपूर्व योगदान रहा है। संग्रहालय के बनने से सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में लोगों को एक छत के नीचे जानकारी मिलेगी।
तीन मूर्ति भवन का निर्माण 1929 में हुआ था। आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू यहां रहने आए और 1964 तक रहे। 1964 में उनकी मृत्यु के बाद तत्कालीन सरकार ने इसे नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और लाइब्रेरी में बदल दिया। वर्तमान में इसे पूर्व प्रधानमंत्रियों की यादों से जोड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान पर प्रदर्शनियां लगना भी शुरू हो गईं है।