हरियाणा में नए सिरे से जारी जाट आरक्षण आंदोलन की आग जल्द ही पूरे उत्तर भारत में फैल सकती है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के मुखिया यशपाल मलिक ने कहा है कि हर हाल में आरक्षण हासिल करने के लिए समिति 8 जून को उत्तर प्रदेश, 10 जून को मध्य प्रदेश और 11 जून को उत्तराखंड में आंदोलन करेगी। इसके बाद राजस्थान सहित कुछ अन्य राज्यों में आंदोलन की तारीख तय की जाएगी। मलिक ने राजनीतिक दलों को आरक्षण मामले में जाट समुदाय को अंधेरे में रखने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अदालती पचड़े से बचाने के लिए आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाना चाहिए। मलिक ने इस दौरान हरियाणा सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में हिंसा के दोषी ठहराए गए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी को जेल भेजने की मांग की। गौरतलब है कि समिति ने रविवार से ही आरक्षण के लिए हरियाणा में नए सिरे से आंदोलन शुरू किया है।
अमर उजाला से बातचीत में मलिक ने कहा कि दशकों से राजनीतिक दल जाट समुदाय को बेवकूफ बना रहे हैं। पहले केंद्र की यूपीए सरकार ने आरक्षण देने का ऐसा रास्ता अपनाया जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद कर दिया। अब हरियाणा सरकार ने भी कांग्रेस की तरह ही आरक्षण न देने केलिए गलत तरीके का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि समाधान आरक्षण को 9वीं अनुसूची में शामिल करना है और इस पर सभी चुप है। यही कारण है कि समिति ने अपने आंदोलन को विस्तार देने का मन बनाया है। मलिक के मुताबिक हरियाणा के बाद समिति उत्तर प्रदेश, फिर मध्य प्रदेश और इसके बाद उत्तराखंड में आंदोलन करेगी। इसके बाद राजस्थान और जम्मू कश्मीर में भी आंदोलन का बिगुल बजाया जाएगा।
यशपाल मलिक से हिमांशु मिश्र की बातचीत
- हरियाणा के बाद उत्तर प्रदेश सहित कुछ और राज्यों में आंदोलन की घोषणा की वजह क्या है?
राजनीति दल और सरकारें हमें दशकों से झुनझुना पकड़ा रही है। हम स्थाई समाधान चाहते हैं। स्थाई समाधान आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने की है। इस पर केंद्र की मोदी सरकार भी यूपीए सरकार की तरह बहाने बना रही है।
- सैंकड़ों जातियां आरक्षण की मांग कर रही हैं, ऐसे में आरक्षण के लिए अन्य जातियां भी ऐसा ही मांग नहीं करेंगी?
तो इसमें समस्या क्या है? जिसे भी आरक्षण की जरूरत है, उसे दिया जाना चाहिए। सरकार खुद इस आशय का मापदंड बनाए।
- हरियाणा सरकार ने तो वादे के मुताबिक आरक्षण भी दिया। हाईकोर्ट के स्टे के बाद अन्य विकल्प तलाशने की भी बात कर रही है। फिर नए सिरे से आंदोलन की वजह क्या है?
एक भी वादा पूरा नहीं किया हरियाणा सरकार ने। सरकार इतनी ही ईमानदार है तो अब तक आरक्षण को 9वीं सूची में शामिल करने की पहल तक क्यों नहीं की? इसके अलावा भी कई वजह हैं।
- आप पर देशद्रोह का मुकदमा भी एक वजह नहीं है?
आरक्षण के दौरान हिंसा का हमने कभी समर्थन नहीं किया। हम अब भी कह रहे हैं जो दोषी हैं उन्हें सजा दें। मगर यहां तो बेकसूर युवाओं को जेल में डाल दिया गया। मेरा सवाल है कि प्रकाश सिंह कमेटी ने जिन 90 अधिकारियों और सांसद राजकुमार सैनी को दोषी माना, उसे जेल में क्यों नहीं डाल रही सरकार?
- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में यह दबाव बनाने की कोशिश नहीं है?
हम तो अपना हक मांग रहे हैं वह भी शांतिपूर्ण ढंग से। हां अगर सरकारें इस मामले में राजनीति करेगी तो जाट बिरादरी भी इस मामले में राजनीतिक निर्णय करने पर मजबूर होगी। सिर्फ यह बताना चाहते हैं कि जाट किसी से नहीं डरते।