मराठा कोटा कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने रविवार को अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के अपने फैसले की पुष्टि की। उन्होंने मांग की कि कुनबी मराठों के 'रक्त संबंधियों' पर मसौदा अधिसूचना को कानून में बदलने के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाया जाए। कार्यकर्ता ने शनिवार को जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सरती में अपना आंदोलन शुरू किया।
बता दें कि एक साल से भी कम समय में यह चौथी बार है जब वह मराठा समुदाय को ओबीसी (अन्य पिछड़ी जाति) समूह के तहत शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। जारांगे (40) ने पहले मुंबई तक एक विशाल मार्च का नेतृत्व किया था, जो 26 जनवरी को इसकी सीमाओं पर समाप्त हुआ था।
सीएम शिंदे ने दिखाई अधिसूचना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा उन्हें एक मसौदा अधिसूचना दिखाई गई, उसके बाद वह वापस चले गए। इसमें कहा गया था कि 'ऋषि सोयर' या मराठा के रक्त संबंधी जिसके पास भी यह दर्शाने का रिकॉर्ड होगा कि वह कुनबी समुदाय से है, उसे भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। यानी कि एक ऐसा कृषि समुदाय जिसे ओबीसी कोटा प्राप्त है।
प्रदर्शकारियों के खिलाफ दर्ज मामले तुरंत वापस लिए जाएं
जरांगे ने शनिवार को आगे कहा कि सरकार को कुनबी रिकॉर्ड रखने वाले 57 लाख लोगों को (ओबीसी) जाति प्रमाण पत्र जारी करना चाहिए। कार्यकर्ता रविवार को अनशन जारी रखने के अपने फैसले पर कायम रहे। फिलहाल, उन्होंने यह भी मांग की है कि राज्यभर में मराठा समुदाय के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले तुरंत वापस लिए जाएं।