महाराष्ट्र के पुणे में नेशनल फिल्म अर्काइव ऑफ इंडिया के परिसर दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने डॉक्यूड्रामा की स्क्रीनिंग पर आपत्ति जताई। डॉक्यूड्रामा में भारतीय सेना को खराब छवि में दिखाया जा रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, बाद में पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत नोटिस जारी कर उन्हें रिहा कर दिया।
भारतीय सेना की छवि खराब दिखाई
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनएफएआई के ए फेस्टिवल ऑफ कंटेंपररी इंडियन फिलम्स के हिस्से के रूप में आई एम नॉट द रिवर झेलम नाम की एक डॉक्यूड्रामा को प्रदर्शित किया गया। इसी ड्रामा के विरोध में प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने स्क्रीनिंग बंद करने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष रवींद्र पडवाल ने कहा कि फिल्म में कश्मीर में भारतीय सेना की छवि खराब दिखाई जा रही है। हम इसी का विरोध कर रहे थे। दर्शकों में मौजूद कुछ लोगों ने हमें फिल्म में दिखाए गए आपत्तिजनक दृश्यों की जानकारी दी थी। हम यहां पहुंचे तो फिल्म खत्म होने वाली थी। हमने सेना के समर्थन में नारे लगाए।
9 फरवरी से 11 फरवरी तक आयोजित फिल्म महोत्सव
पडवाल का कहना है कि भले ही लोग अलग-अलग विचारधाराओं का पालन करते हों लेकिन उन्हें भारतीय सेना पर गर्व करना चाहिए। अगर निर्देशक ने भारतीय सेना की छवि को खराब दिखाया है तो यह देशद्रोह है। उनके खिलाफ अपराध दर्ज किया जाना चाहिए। एनएफएआई फिल्म महोत्सव 9 फरवरी से 11 फरवरी तक आयोजित किया गया था। इस दौरान हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, तमिल, मणिपुरी-तंगखुल, राजस्थानी-हिंदी और खासी-जयंतिया-गारो-हिंदी भाषा की कई फिल्मों को पुरस्कृत किया गया।