मुख्यमंत्री शिंदे ने वीडियो संदेश में क्या कहा?
इस बीच, एक वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मराठा आरक्षण मुद्दे से जुड़ी राज्य सरकार की सुधारात्मक याचिका स्वीकार कर ली है और इस पर 24 जनवरी को सुनवाई होगी। शिंदे ने कहा कि इसने समुदाय के लिए 'उम्मीद की खिड़की' खोल दी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने लोगों से संयम बरतने का आग्रह किया। शिंदे ने यह भी कहा कि मराठों को आरक्षण देते समय अन्य समूहों के आरक्षण के लाभ अछूते रहेंगे।
आजाद मैदान में शुरू करूंगा भूख हड़ताल: जरांगे
बीड में रैली में बोलते हुए जरांगे ने कहा, मैं 20 जनवरी से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करूंगा। मराठों को दबाना मुश्किल है। हम समुदाय के लिए आरक्षण हासिल किए बिना वापस नहीं लौटेंगे। आरक्षण कार्यकर्ता ने कहा कि वह जालना जिले के अंतरवाली स्थित अपने गांव से पैदल ही रवाना होंगे और मुंबई पहुंचेंगे जिस दौरान समुदाय के सदस्य भी उनके साथ शामिल होंगे।जरांगे ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 24 दिसंबर तक का समय दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय में अपना विचार रखेगी कानूनी टीम: सीएम
शिंदे ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि राज्य सरकार की कानूनी टीम उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपना विचार रखेगी और यह साबित करने के लिए सभी प्रयास करेगी कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य पिछड़ा आयोग मराठा समुदाय और उसकी दुर्दशा पर 'बड़े पैमाने' पर अनुभवजन्य आंकड़े जुटा रहा है।
'फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने दिया था मराठा आरक्षण'
उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था, जिसे बंबई उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार अदालत के समक्ष अपनी बात साबित करने में विफल रही। शिंदे ने कहा, 'मराठा समुदाय के बारे में अनुभवजन्य आंकड़े एकत्र करते समय (आरक्षण को रद्द करते समय) उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को संज्ञान में लिया जाएगा। इससे मामले को उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश करने में मदद मिलेगी।'