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अब कांग्रेस को दूसरा अहमद पटेल नहीं मिलेगा, जनार्दन द्विवेदी की प्रतिक्रिया

Wed, 25 Nov 2020 05:51 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अहमद पटेल 1977 से कांग्रेस की केन्द्रीय राजनीति को समझने वाले नेता थे। राजीव गांधी के संसदीय सचिव लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया के राजनीतिक सचिव के रूप में राजनीति का स्वर्णकाल देखने के बाद भी कभी उन्होंने मर्यादा नहीं लांघी...
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कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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व्यक्ति का प्रभाव दूसरे पर ऐसा असर छोड़ता है कि उसे भूल पाना बहुत कठिन होता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी के साथ अहमद पटेल के निधन की खबर उन्हें इतना ही स्तब्ध कर देने वाली हैं। जर्नादन द्विवेदी पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं में हैं, जो समाजवादी विचारधारा से कांग्रेस पार्टी में आए थे। राम मनोहर लोहिया से समाजवाद का ककहरा सीखने वाले द्विेवेदी की एक खासियत और है। उन्होंने राजनीति में कभी अपनी मर्यादा नहीं लांघी। आज 40 साल तक साथ निभाने वाले अहमद पटेल के निधन के समाचार ने उन्हें बहुत व्यथित कर रखा है।

अब कांग्रेस को दूसरा अहमद पटेल नहीं मिलेगा

जनार्दन द्विवेदी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दु:खद एवं असामयिक है। अब कांग्रेस पार्टी को दूसरा अहमद पटेल नहीं मिलेगा। इतना भर कहने के बाद द्विवेदी का गला भर्रा आया। इससे पहले सुबह भी उनसे फोन पर बात हुई। अहमद पटेल के निधन का समाचार देने के बाद उनकी दो शब्दों की श्रद्धांजलि, चाही लेकिन जनार्दन कुछ नहीं बोल पाए। केवल इतना कहकर चुप हो गए कि औपचारिकता की भाषा उन्हें नहीं आती। वह नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या बोलें और क्या न बोलें। अभी वह इस पर कुछ नहीं बोलेंगे। लेकिन कुछ घंटे बाद जर्नादन द्विवेदी को अहसास हुआ। ऐसा विरले नेताओं के स्वभाव में मिलेगा कि वह फिर फोन करें और बताएं कि किसी अन्य को प्रतिक्रिया दे दी है। आप भी सुन लें।

सच कह रहे हैं जर्नादन

कांग्रेस को वास्तव में दूसरा अहमद पटेल नहीं मिलेगा। अहमद पटेल 1977 से कांग्रेस की केन्द्रीय राजनीति को समझने वाले नेता थे। राजीव गांधी के संसदीय सचिव लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया के राजनीतिक सचिव के रूप में राजनीति का स्वर्णकाल देखने के बाद भी कभी उन्होंने मर्यादा नहीं लांघी। हमेशा विरोधियों के लिए भी बातचीत की गुंजाइश रखी। अहमद पटेल के बारे में कहा जाता है कि विरोधी भले उनसे चौकन्ना रहे, लेकिन पूर्वाग्रह पालकर कभी वह उसका नुकसान करने का प्रयास नहीं करते थे। हां, उसके बारे में अपनी राय समय आने या पूछे जाने पर जरूर देते थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए 2004 से लगातार वह एक संकट मोचक मैनेजर की भूमिका में थे। ऐसा मैनेजर जिसके पास कांग्रेस के संकट कोई न कोई समाधान जरूर होता था।

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