कर्नाटक सरकार ने सरकारी अस्पतालों में चल रहे जन औषधि केंद्र (जेएके) बंद करने का फैसला लिया है। ये फैसला क्यों लिया गया है इसके बारे में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये फैसला इसलिए लिया गया ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मुफ्त और भरोसेमंद तरीके से मिल सकें और उनका खर्चा कम हो।
कर्नाटक के सभी सरकारी अस्पतलाों में चलने वाले जन औषधि केंद्र को बीते दिनों बंद कर दिया गया। इसके बाद कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बताया कि आखिर कर्नाटक सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों के अंदर चल रहे जन औषधि केंद्र (जेएके) बंद करने का फैसला इसलिए लिया है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मुफ्त और भरोसेमंद तरीके से मिल सकें और उनका खर्चा कम हो।
मंत्री ने बताया क्यों उठाया कदम?
दिनेश गुंडू ने केंद्र सरकार से किया अनुरोध
इसके अलावा उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के तहत मिलने वाली दवाएं बाजार की दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत सस्ती होती हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि जन औषधि केंद्रों को दी जाने वाली दवाओं की कीमतें कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग को भी दी जाएं ताकि मुफ्त दवाओं की आपूर्ति और बेहतर हो सके। अंत में मंत्री ने कहा कि सरकार लोगों को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए लगातार काम कर रही है।