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Karnataka: सरकारी अस्पतालों के अंदर जन औषधि केंद्र बंद, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया क्यों उठाया ये कदम?

Wed, 06 Aug 2025 06:23 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक सरकार ने सरकारी अस्पतालों में चल रहे जन औषधि केंद्र (जेएके) बंद करने का फैसला लिया है। ये फैसला क्यों लिया गया है इसके बारे में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये फैसला इसलिए लिया गया ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मुफ्त और भरोसेमंद तरीके से मिल सकें और उनका खर्चा कम हो।

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कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव। - फोटो : एक्स
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विस्तार
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कर्नाटक के सभी सरकारी अस्पतलाों में चलने वाले जन औषधि केंद्र को बीते दिनों बंद कर दिया गया। इसके बाद कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बताया कि आखिर कर्नाटक सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों के अंदर चल रहे जन औषधि केंद्र (जेएके) बंद करने का फैसला इसलिए लिया है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मुफ्त और भरोसेमंद तरीके से मिल सकें और उनका खर्चा कम हो।

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बता दें कि राव का यह स्पष्टीकरण केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे एक पत्र में कर्नाटक के सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों को बंद करने के संबंध में उठाई गई चिंताओं के जवाब में आया है।

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मंत्री ने बताया क्यों उठाया कदम?

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मंत्री राव ने बताया कि अब अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर केवल उन दवाओं की ही लिखाई करेंगे जो अस्पताल की आपूर्ति में उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों को दवाएं मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। अस्पतालों को दवाएं देने के लिए राज्य की मेडिकल सप्लाई कंपनी काम कर रही है और जरूरत पड़ने पर अस्पतालों को स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने के निर्देश भी दिए गए हैं।

केवल जन ऑषधि केंद्र पर लागू होगा फैसला
इसके साथ ही दिनेश गुंडू राव ने साफ किया कि यह फैसला केवल अस्पतालों के अंदर के जन औषधि केंद्रों पर लागू होगा, बाहर के केंद्र वैसे ही काम करते रहेंगे और लोग वहां अपनी पसंद से दवाएं खरीद सकते हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक में कुल 1,417 जन औषधि केंद्र काम कर रहे हैं, जिनमें से केवल 184 अस्पतालों के अंदर हैं। यह कदम खासतौर पर गरीब और कमजोर तबके के लिए उठाया गया है जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं।

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दिनेश गुंडू ने केंद्र सरकार से किया अनुरोध
इसके अलावा उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के तहत मिलने वाली दवाएं बाजार की दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत सस्ती होती हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि जन औषधि केंद्रों को दी जाने वाली दवाओं की कीमतें कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग को भी दी जाएं ताकि मुफ्त दवाओं की आपूर्ति और बेहतर हो सके। अंत में मंत्री ने कहा कि सरकार लोगों को सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए लगातार काम कर रही है।

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