कोलकाता की एक अदालत ने देश की सुरक्षा के खिलाफ बड़ी साजिश रचने वाले जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के पांच ऑपरेटिव्स को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इन्हें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, विस्फोट करने की योजना बनाने और हथियार जुटाने का दोषी पाया। दो दोषी बांग्लादेशी नागरिक हैं, जो अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और कई राज्यों में हमलों की तैयारी कर रहे थे।
सिटी सेशंस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रोहन सिन्हा ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि पांचों आरोपियों ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित कोशिश की। इन सभी को आईपीसी की धारा 121 और 122 के तहत दोषी पाया गया, जो भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और इसके लिए हथियार जुटाने से संबंधित है। जिन दो आरोपियों की नागरिकता बांग्लादेश की है, उन्हें विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत भी सजा दी गई है।
खतरनाक साजिश का खुलासा
कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सितंबर 2016 में पश्चिम बंगाल और असम से इन छह आरोपियों को विस्फोटक सामग्री, आईईडी बनाने के उपकरण और आतंकी गतिविधियों की विस्तृत योजनाओं के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी उत्तर-पूर्व राज्यों और दक्षिण भारत में कई जगह बम धमाकों की तैयारी में थे। एसटीएफ के अनुसार, ये आतंकी भारत में अवैध तरीके से घुसकर अपने साथियों से मिलने और हमलों की रणनीति बनाने आए थे।
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खागरागढ़ ब्लास्ट से कनेक्शन
यह भी सामने आया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कई 2014 के खागरागढ़ ब्लास्ट केस में पहले ही दोषी करार दिए जा चुके हैं। उस धमाके में दो आतंकी तब मारे गए थे, जब वे आईईडी तैयार कर रहे थे। छह में से एक आरोपी, अब्दुल कलाम, को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। बाकी पांच के खिलाफ न केवल साजिश के दस्तावेज मिले, बल्कि भारत में हमला करने के उद्देश्य की स्पष्ट योजना एसटीएफ और बाद में एनआईए की जांच में उजागर हुई।
बड़े उद्देश्य, बड़ा खतरा
एसटीएफ ने बयान में कहा कि जेएमबी के ये आतंकी भारत को मुख्य बाधा मानते थे, जो बांग्लादेश में शरीयत लागू करने और ग्रेटर बांग्लादेश बनाने की उनकी विचारधारा के रास्ते में खड़ा है। यही नहीं, वे रोहिंग्या तथा कश्मीर मुद्दे का हवाला देकर भारत के खिलाफ बदला लेने की सोच रखते थे। एसटीएफ ने बताया कि दोनों बांग्लादेशी आरोपियों ने भारत में पहचान छुपाने के लिए फर्जी भारतीय पहचान पत्र भी बनाए थे, ताकि वे आसानी से आतंकी नेटवर्क तैयार कर सकें।
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