जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों की आहट शुरू हो गई है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक ही चलता रहा तो इस सीजन की बर्फबारी के खत्म होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो जाएंगे। अनुमान के मुताबिक मार्च या अप्रैल महीने में मौसम अनुकूल होगा और जम्मू कश्मीर में चुनाव होंगे। फिलहाल जम्मू कश्मीर में नई मतदाता सूचियों का अंतिम और फाइनल प्रकाशन 25 नवंबर को हो जाएगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव आयोग अपनी तमाम तैयारियों के साथ राज्य में चुनाव की तारीखों का एलान जम्मू-कश्मीर के मौसम को देखते हुए कर सकता है। वहीं दूसरी ओर धारा 370 खत्म होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर का मतदाता बन सकता है। राजनीतिक हलकों में यह एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर की सियासत में इसका राजनीतिक दलों ने विरोध शुरू कर दिया है।
25 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म होने के बाद ही परिसीमन आयोग ने चुनावी तैयारियों के लिए सर्वे कराने की तैयारियां शुरू कर दी थी। अब परिसीमन आयोग की तैयारियों के साथ आई हालिया रिपोर्ट से अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराए जा सकते हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार के मुताबिक 15 सितंबर को समग्र मतदाता सूचियों के मसौदे का प्रकाशन होगा। उसके बाद 10 नवंबर तक दावे और आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा। मुख्य चुनाव अधिकारी के मुताबिक दावे और आपत्तियों के निराकरण के बाद 25 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। मुख्य चुनाव आयोग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि चुनाव कराने से पहले अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सबसे महत्वपूर्ण होता है। जम्मू-कश्मीर में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 25 नवंबर को कर दिया जाएगा। ऐसे में यह माना जाता है कि चुनाव आयोग अब चुनाव कराने की स्थिति में पूरी तरीके से तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्योंकि अंतिम मतदाता सूची 25 नवंबर को प्रकाशित कर दी जाएगी, इसलिए यह तय है कि चुनावी रूपरेखा को पूरी तरीके से अमलीजामा पहना दिया गया है। उसके बाद चुनाव आयोग तारीखों का एलान कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग 25 नवंबर के बाद चुनाव कराने की स्थिति में होगा। लेकिन दिसंबर से लेकर मार्च के शुरुआती दिनों में जम्मू-कश्मीर का मौसम चुनाव के लिहाज से मुफीद नहीं होगा। क्योंकि सर्दियों में घाटी में अच्छी खासी बर्फबारी भी होती है, ऐसे में चुनाव कराना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं माना जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल के दौरान जब बर्फबारी कम होगी, तब चुनाव आयोग तारीखों का एलान कर सकता है। धारा-370 हटाने के बाद पहली बार कश्मीर में चुनाव होने हैं, तो चुनाव आयोग के लिए भी यह बड़ी परीक्षा होगी कि वोट प्रतिशत ज्यादा से ज्यादा रहे। ऐसी दशा में मौसम का अनुकूल होना बेहद जरूरी माना जाता है। इस लिहाज से यह माना जा रहा है कि चुनाव मार्च या अप्रैल में हो सकते हैं।
बढ़ेंगे 25 लाख मतदाता!
परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में तकरीबन 25 लाख मतदाताओं की संख्या के बढ़ने का अनुमान है। चूंकि धारा 370 की समाप्ति के बाद कश्मीर में कोई भी देश का नागरिक मतदाता बन सकता है। मतदाता बनने के लिए किसी भी तरीके के डोमिसाइल की आवश्यकता नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़े हुए वोटरों और परिसीमन आयोग की नई व्यवस्था के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में होने वाले चुनाव भाजपा के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर से बाहर रहने वाले कश्मीरी पंडितों की बड़ी संस्था रूट्स इन कश्मीर के प्रवक्ता अमित रैना का कहना है कि चुनाव आयोग का यह फैसला स्वागत योग्य है। अमित कहते हैं कि जम्मू कश्मीर के डोमिसाइल होल्डर होने के बाद जब वह उत्तर प्रदेश के वोटर हो सकते हैं, तो उत्तर प्रदेश या बिहार का कोई व्यक्ति कश्मीर का वोटर क्यों नहीं हो सकता है। वह कहते हैं कि धारा-370 खत्म होने के बाद पूरे देश में जो वोटर बनने की व्यवस्था है वही कश्मीर में भी लागू हुई है। इसलिए 25 लाख वोटर बढ़ना कोई छोटी बात नहीं है। रूट्स इन कश्मीर से जुड़े लोगों का मानना है कि कश्मीर में आने वाले दिनों में एक बेहतरीन और स्थाई सरकार से लोगों का न सिर्फ जीवन यापन बेहतर होगा बल्कि पूरी व्यवस्था और मजबूत होगी।
हालांकि मतदाता सूची में बढ़ रहे 25 लाख नए वोटरों को लेकर सियासत भी गरम हो गई है। कश्मीर के राजनीतिक दलों ने इस पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा के लिए तो जम्मू कश्मीर एक प्रयोगशाला बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 25 लाख नए मतदाता बाहर से लाए जा रहे हैं। नई मतदाता सूची और बढ़ रहे मतदाताओं को लेकर नेशनल कांफ्रेंस ने भी हमला बोला है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता तनवीर सादिक ने कहा कि 25 लाख नए वोटर बाहर से आकर यहां पर वोट करेंगे और फिर वापस अपने राज्य में चले जाएंगे। ऐसे में जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों को उनके मतदान से वंचित कर दिया जाएगा। हालांकि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के मुख्य चुनाव अधिकारी का कहना है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद मतदाता बनने के वही सारे नियम कानून लागू हो रहे हैं जो कि सारे देश में लागू होते हैं।