जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन मल्होत्रा का निधन
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जम्मू कश्मीर से एक दुखद खबर सामने आई है। दरअसल, यहां के पूर्व राज्यपाल जगमोहन मल्होत्रा का सोमवार (4 मई) को निधन हो गया। 94 साल के मल्होत्रा कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे जिसके बाद दिल्ली में उन्होंने आखिरी सांस ली।
इधर, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'जगमोहन जी का निधन हमारे राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह अनुकरणीय प्रशासक और प्रसिद्ध विद्वान थे। उन्होंने हमेशा भारत की बेहतरी की दिशा में काम किया। बतौर मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई नवप्रवर्तक नीतियां बनाईं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।' प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जगमोहन के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल के रूप में जगमोहन जी के कार्यकाल को हमेशा याद किया जाएगा।
दो बार संभाला था जम्मू कश्मीर के गवर्नर का पद
जगमोहन जम्मू कश्मीर के गवर्नर रहने के अलावा केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। वे दिल्ली और गोवा के उपराज्यपाल भी रहे थे। जगमोहन लोकसभा में भी निर्वाचित हुए थे। उन्होंने नगरीय विकास व पर्यटन मंत्री के पद का भी कार्यभार संभाला था। उन्होंने जम्मू कश्मीर के गवर्नर का पद दो बार संभाला था। वह 1984 से 1989 तक और फिर 1990 में जनवरी से मई तक इस पद पर रहे थे। कभी सख्त नौकरशाह के तौर पर दिल्ली में पहचान बनाने वाले जगमोहन मल्होत्रा बाद में राजनीति में उतरे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह मंत्री भी बने थे।
जगमोहन से मुलाकात के साथ अमित शाह ने की थी संपर्क अभियान की शुरुआत
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भाजपा ने जब संपर्क अभियान शुरू किया था तो उस समय अमित शाह और मौजूदा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन मल्होत्रा से मिलने चाणक्यपुरी स्थित उनके घर पहुंचे थे। अमित शाह ने संपर्क अभियान की शुरुआत जगमोहन से मुलाकात के साथ शुरू की थी। जगमोहन को पहले कांग्रेस सरकार ने 1984 में राज्यपाल बनाकर भेजा। पहली पारी के दौरान वह जून 1989 तक राज्यपाल रहे। फिर वीपी सिंह सरकार ने उन्हें दोबारा जनवरी 1990 में राज्यपाल के रूप में भेजा। वह इस पद पर मई 1990 तक रहे।
सख्त फैसले लिए
राज्यपाल रहते हुए जगमोहन ने घाटी में कई सख्त फैसले लिए। आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन की भी रणनीति बनाई। कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार भी रोकने की कोशिश की। हालांकि, स्थानीय नेताओं का उन्हें खासा विरोध भी झेलना पड़ा। 2004 में अरुण शौरी ने कहा था, ‘यह जगमोहन ही रहे, जिन्होंने भारत के लिए घाटी को बचाया। उन्होंने धीरे-धीरे राज्य के अधिकार को फिर से स्थापित किया और आतंकवादियों को भगाया।’