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Kanpur Violence: यूपी में आरोपियों के मकान ढहाने की कार्रवाई के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

Mon, 13 Jun 2022 09:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आवेदन में उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश देने की मांग की गई है कि कानपुर जिले में अतिरिक्त कानूनी दंडात्मक उपाय के रूप में किसी भी आपराधिक कार्यवाही में किसी भी आरोपी की आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति के खिलाफ  कोई प्रारंभिक कार्रवाई नहीं की जाए।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पैगंबर के खिलाफ की गई टिप्पणी के विरोध में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरोपियों के घरों को गिराने की कार्रवाई से खफा जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश देने की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई और विध्वंस नहीं किया जाए। 

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आवेदन में संगठन ने उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा बनाए गए नगरपालिका कानूनों के उल्लंघन कर कथित रूप से ध्वस्त किए गए घरों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देने की भी मांग की है। संगठन ने दिल्ली के जहांगीरपुरी में विध्वंस अभियान के खिलाफ अपनी पिछली याचिका में दायर दो आवेदनों के माध्यम से यह राहत मांगी है। जहांगीर पुरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) द्वारा शुरू किए गए विध्वंस अभियान के खिलाफ नोटिस जारी किया था और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। 

आवेदन में उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश देने की मांग की गई है कि कानपुर जिले में अतिरिक्त कानूनी दंडात्मक उपाय के रूप में किसी भी आपराधिक कार्यवाही में किसी भी आरोपी की आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति के खिलाफ  कोई प्रारंभिक कार्रवाई नहीं की जाए।आवेदन में कहा गया है कि कुछ दिनों पहले दो राजनीतिक नेताओं द्वारा कुछ आपत्तिजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी जिससे देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था। दो राजनीतिक नेताओं की टिप्पणी के विरोध में कानपुर जिले में लोगों के एक समूह द्वारा बंद का आह्वान किया गया था।
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विरोध वाले दिन, हिंदू और मुस्लिम धार्मिक समुदाय के बीच हाथापाई हुई और दोनों समुदायों के बीच पथराव हुआ। आवेदक ने आरोप लगाया है कि कानपुर में हुई हिंसा के बाद मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों ने मीडिया में कहा था कि संदिग्धों व आरोपी की संपत्तियों को जब्त और ध्वस्त कर दिया जाएगा। 

आवेदन में कहा गया है कि किसी भी प्रकार का विध्वंस अभ्यास कानूनों के अनुसार किया जाना चाहिए और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को नोटिस और सुनवाई का अवसर देने के बाद ही किया जाना चाहिए।

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