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Jamaat-E-Islami: भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को बिगाड़ने की साजिश, प्रॉक्सी समूहों का इस्तेमाल कर रहा जमात

Mon, 22 Jun 2026 03:43 PM IST
Pavan आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

भारत अवैध प्रवासियों के मामले में कानून के तहत कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जमात और उससे जुड़े समूह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बांग्लादेश आजाद पार्टी खुद को स्वतंत्र संगठन बताता है, लेकिन इसके अधिकांश सदस्य जमात से जुड़े हुए हैं।
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शफीकुर रहमान, प्रमुख, जमात-ए-इस्लामी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश की प्रमुख इस्लामी राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी पर आरोप लगा है कि वह भारत-बांग्लादेश संबंधों को कमजोर करने के लिए नए संगठनों और सहयोगी समूहों का इस्तेमाल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जमात सीधे तौर पर भारत विरोधी प्रदर्शनों में सामने नहीं आना चाहती, क्योंकि वह खुद को एक जिम्मेदार विपक्षी दल के रूप में पेश करना चाहती है। अधिकारियों का कहना है कि बांग्लादेश में इस साल हुए आम चुनावों में जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। उसके नेतृत्व वाले गठबंधन के पास संसद में कुल 77 सीटें हैं।
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बीएनपी सरकार में दोनों देशों के सुधर रहे रिश्ते
वहीं, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार देखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, जमात इस सुधार से खुश नहीं है और वह भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए वह छोटे संगठनों और फ्रंट समूहों का सहारा ले रही है, ताकि सीधे तौर पर उस पर आरोप न लगे।

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बांग्लादेश आजाद पार्टी के प्रदर्शन पर उठे सवाल
19 जून को ढाका में बांग्लादेश आजाद पार्टी (बीएपी) नाम के एक अपेक्षाकृत नए संगठन ने प्रदर्शन किया। इस संगठन ने भारत द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला भी फूंका गया।

मानवाधिकार का मुद्दा बनाकर भारत को घेरने की कोशिश
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि इन समूहों का उद्देश्य अवैध प्रवास के मुद्दे को मानवाधिकार संकट के रूप में पेश करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब की जा सके। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जमात और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

अन्य संगठन भी सक्रिय
अधिकारियों के अनुसार, जमात को समर्थन देने वाले कई अन्य संगठन भी भारत विरोधी अभियानों में शामिल हो सकते हैं। इनमें नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी), इस्लामिक आंदोलन बांग्लादेश, आमार बांग्लादेश पार्टी, बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन और निजाम-ए-इस्लाम पार्टी शामिल हैं। एनसीपी एक छात्र संगठन है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अधिकारियों का मानना है कि भारत और शेख हसीना सरकार के करीबी संबंधों के कारण भी कुछ समूह भारत विरोधी रुख अपना रहे हैं।
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आईएसआई की भूमिका को लेकर भी आरोप
सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान की आईएसआई बांग्लादेश में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रही है और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा करना चाहती है। अधिकारियों का कहना है कि 1971 के मुक्ति संग्राम की विरासत और भारत की हालिया अवैध प्रवासन विरोधी कार्रवाइयों के कारण आईएसआई और जमात दोनों चिंतित हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में जमात नए संगठनों को बढ़ावा देकर भारत विरोधी गतिविधियों को और तेज कर सकती है। उनका कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी समूहों के जरिए जमात और आईएसआई अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि खुद को सीधे विवाद से दूर रखना चाहते हैं।
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