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जलपाईगुड़ी हादसा: जन्मदिन पर केक का वादा रहा अधूरा, पिता ने गंवाई जान; मातम में बदलीं 11 वर्षीय बेटी की खुशी

Tue, 18 Jun 2024 06:30 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

सिलीगुड़ी से अपने बेटी का 11 वां जन्मदिन मनाने के लिए कंचनजंगा एक्सप्रेस में बैठे पिता ने हादसे में जान गंवा दी। उसकी बेटी पिता के केक लाने का इंतजार करती रही। ट्रेन पर चढ़ने से पहले पिता ने अपनी बेटी से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने वादा भी किया था कि वो उसके लिए केक लेकर आएगा।
 
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जलपाईगुड़ी के पास हुआ रेल हादसा - फोटो : pti
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विस्तार
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सिलीगुड़ी से अपने बेटी का 11 वां जन्मदिन मनाने के लिए कंचनजंगा एक्सप्रेस में बैठे पिता ने हादसे में जान गंवा दी। उसकी बेटी पिता के केक लाने का इंतजार करती रही। ट्रेन पर चढ़ने से पहले पिता ने अपनी बेटी से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने वादा भी किया था कि वो उसके लिए केक लेकर आएगा।
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कोलकाता के बल्लीगंज इलाके में जमीर लाइन के 31 वर्षीय निवासी सुभोजीत माली शुक्रवार को कुछ ऑफिस के काम से सिलीगुड़ी गए थे। उन्हें कुछ दिन बाद लौटना था। लेकिन सोमवार को बेटी सृष्टि का 11 वां जन्मदिन था। सुभोजीत ने बेटी ने उससे वीडियो कॉल पर बात की। उसने वादा किया था कि वह जन्मदिन का केक लेकर आएगा और पूरे परिवार - अपने बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों - को जश्न मनाने के लिए बाहर ले जाएगा। अपनी बेटी को 'मां' कहते हुए उसने अपनी आखिरी बातचीत के दौरान अपनी बेटी सृष्टि से कहा, "मैं किसी भी कीमत पर घर वापस आऊंगा... चिंता मत करो।"

बता दें कि सोमवार सुबह सिलीगुड़ी के न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से 30 किलोमीटर दूर रंगापानी के पास खड़ी सियालदह जाने वाली कंचनजंगा एक्सप्रेस को एक मालगाड़ी ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद उनकी जान चली गई। उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने मंगलवार को बताया कि अब तक इस दुर्घटना में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
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सुभोजीत की बेटी सृष्टि के जन्मदिन की सभी तैयारियां हो चुकी थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी के पिता सुभोजित माली की जगह, राज्य के उत्तरी हिस्से में न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के पास रंगापानी में ट्रेन दुर्घटना में उनकी मौत की खबर आई। दक्षिण कोलकाता के एक स्कूल में कक्षा पांच की छात्रा सृष्टि भी अपने परिवार के अन्य सदस्यों की तरह यह स्वीकार नहीं कर पा रही है कि उसके पिता कभी जीवित घर नहीं लौटेंगे।

मृतक की चचेरी बहन प्रिया प्रधान ने बताया, "उन्हें कुछ दिनों बाद लौटना था, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी के जन्मदिन के कारण सोमवार को ट्रेन पकड़ी।" उसने बताया कि "उनके एक सहकर्मी सूर्यशेखर पांडा, जो उसी संगठन में काम करते थे, भी सिलीगुड़ी गए थे। कल सुबह, दुर्घटना के बाद, उन्होंने घर पर किसी और के फोन नंबर से कॉल किया और खबर दी।" सुभाजीत का एक 1.5 साल का बेटा भी है, अपनी नौकरी के सिलसिले में अक्सर देश के उत्तरी राज्यों में जाते थे। "वह वहां कारों के उपकरण ले जाते थे। वह पिछले पांच सालों से इस नौकरी में है... वह सड़क मार्ग से घर लौटता था, लेकिन इस बार उसने ट्रेन पकड़ी क्योंकि उसे सृष्टि के जन्मदिन की वजह से वापस आने की जल्दी थी।"

बेटे की जगह भगवान मेरी जान ले लेता- सुभोजीत के पिता
 सुभोजीत के बुजुर्ग पिता बहुत दुखी थे। उन्होंने कहा कि "मुझे नहीं पता कि क्या कहना है! भगवान को मेरे बेटे की जगह मुझे ले लेना चाहिए था। अब उसके बच्चों की देखभाल कौन करेगा?" उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपनी बहू के लिए "कुछ करने" का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं किसी से कोई पैसा नहीं लूंगा, लेकिन मैं हमारी सीएम से अनुरोध करूंगा कि वे देखें कि क्या मेरी बहू के लिए कुछ किया जा सकता है। हो सकता है कि उसे किसी राज्य सरकार के विभाग में नौकरी मिल जाए।"

मिलनसार और मददगार व्यक्ति थे सुभोजीत
स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के पार्षद सुदर्शन मुखोपाध्याय ने सुभोजीत माली को इलाके में सुभो के नाम से पुकारते थे। उन्होंने कहा कि वो एक मिलनसार व्यक्ति थे, जिन्होंने लॉकडाउन अवधि के दौरान कोविड-19 रोगियों सहित लोगों की मदद करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी। मुखोपाध्याय ने याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने पैसे से पीपीई किट भी खरीदी और कोविड मरीजों को अस्पताल ले गए। 
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