ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि औरंगाबाद के पूर्व लोकसभा सांसद इम्तियाज जलील आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार होंगे। ओवैसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी पार्टी के चार उम्मीदवारों का एलान किया। इनमें विधायक मुफ्ती इस्माइल, शाह फारूक अनवर, फारूक शबदी और रईस लश्करिया शामिल हैं।
मुफ्ती इस्माइल मालेगांव सेंट्रल सीट से विधायक हैं, जबकि अनवर धुले शहर के विधायक हैं। लश्करियां एआईएमआईएम के मुंबई इकाई के प्रमुख हैं। इम्तियाज जलील के चुनाव क्षेत्र की घोषणा नहीं की गई है। उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के संदीपन भुमरे से हार का सामना करना पड़ा था।
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर उन्होंने कहा कि अजित पवार की अगुवाई वाली राकांपा को इसका विरोध करना चाहिए। ओवैसी ने कहा, "अजित पवार कहते हैं कि उन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिलाया है, लेकिन धर्मनिरपेक्षता को नहीं छोड़ा है। अगर ऐसा है तो उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार के इस विधेयक का विरोध करना चाहिए। यह विधेयक वक्फ जमीन से जुड़े फैसलों में कलेक्टर को ज्यादा ताकत देता है यह विधेयक संविधान विरोधी है।"
ओवैसी ने कहा कि मोदी सरकार की ओर पेश किया गया वक्फ संशोधन विधेयक 2024 संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है और इसका एकमात्र मकसद मुसलमानों से वक्फ संपत्तियों को छीनना है।
उन्होंने कहा कि हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम, गुरुद्वारा प्रबंधक समिति या ईसाइयों के लिए कभी ऐसा विधेयक पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने इस विधेयक के खिलाफ सुझाव देने के लिए लोगों को क्यूआर कोड के जरिए अपील की है, जो वक्फ का एनआरसी साबित होगा। एआईएमपीएलबी ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और बैठकें करने का फैसला लिया है।
उन्होंने कहा, "हिंदू बंदोबस्ती पर कोई सीमा नहीं लगाई जाती तो वक्फ पर क्यों लगाई जा रही है।" उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कलेक्टर को इतनी शक्ति दे रही है कि जब तक कलेक्टर वक्फ संपत्ति की जांच पूरी नहीं कर लेते, तब तक वह वक्फ बोर्ड को नहीं सौंपी जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार कोई भी कलेक्टर स्वयं को जज नहीं मान सकता।