सरकार इन दोनों मंत्रालयों की संयुक्त समिति का गठन करेगी, जो प्रत्येक तिमाही में समीक्षा बैठक करेगी। पानी की गुणवत्ता पर चौकसी के लिए सरकार गांव-गांव में जांच कराएगी। वहां मौजूद जल मित्र को फील्ड टेस्टिंग किट दी जाएगी जो आपदा और प्रकोप प्रबंधन की स्थिति में जल परीक्षण करेंगे।
जल जनित बीमारियों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने अब गांव से शहर तक पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य जांच का फैसला लिया है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने इस संयुक्त निगरानी का रोडमैप जारी किया है। इसके मुताबिक केंद्रीय जल शक्ति और स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर एक्शन प्लान बनाएंगे।
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सरकार इन दोनों मंत्रालयों की संयुक्त समिति का गठन करेगी, जो प्रत्येक तिमाही में समीक्षा बैठक करेगी। पानी की गुणवत्ता पर चौकसी के लिए सरकार गांव-गांव में जांच कराएगी। वहां मौजूद जल मित्र को फील्ड टेस्टिंग किट दी जाएगी जो आपदा और प्रकोप प्रबंधन की स्थिति में जल परीक्षण करेंगे।
राज्यों को जारी दिशा-निर्देश में एनसीडीसी ने कहा है कि ग्राम स्तर पर स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की नियमित जांच होगी। साथ ही स्थानीय प्रशासन बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदाओं में अस्थायी जल आपूर्ति स्रोत की पहचान करेगा। एनसीडीसी के मुताबिक जल गुणवत्ता निगरानी और जल जनित बीमारियों के स्वास्थ्य परिणामों पर संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करने के लिए गांव से लेकर जिला, राज्य और केंद्रीय स्तर तक निगरानी बहुत जरूरी है। एनसीडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश में पानी की गुणवत्ता को लेकर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। जहां एक तरफ जलवायु परिवर्तन से वर्षा पैटर्न में बदलाव और बाढ़–सूखे की घटनाएं बढ़ीं हैं। वहीं, भूजल का अत्यधिक दोहन से खारेपन और खतरनाक रसायनों (आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट) का स्तर बढ़ा है। औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण से नदियों और झीलों की स्थिति खराब हुई है। हर साल इनसे जुड़े डायरिया, हैजा, पेचिश, हेपेटाइटिस ए/ई और त्वचा व आंखों के संक्रमण जैसी बीमारियों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
हर ब्लॉक में हॉटस्पॉट की होगी तलाश
एनसीडीसी ने दिशा-निर्देशों में कहा है कि देश के सभी ब्लॉक स्तर पर पानी के उन स्रोतों की पहचान होगी जिनसे आबादी का संपर्क है। इसके अलावा ग्राम और पंचायत स्तर पर जल मित्र और आशा कार्यकर्ता को फील्ड जांच का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक गांव में गठित ग्राम जल स्वच्छता समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति का सहयोग लिया जाएगा।
पानी की वजह से पुणे में फैली बीमारी
एनसीडीसी ने बताया कि इस साल पुणे में गुलियन-बेरी सिंड्रोम के चलते 100 से भी ज्यादा लोग बीमार पड़े। यह एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी विकार है लेकिन जब इस बीमारी के फैलने के कारणों का पता लगाया गया तो कुछ समय बाद पानी की वजह से बीमारी का पता चला। धीरे धीरे स्वास्थ्य विभाग की टीमें खडकवासला झील तक पहुंच गईं और वहां बीमारी का स्त्रोत मिला। जांच में यह भी पता चला कि इस झील के पास पोल्ट्री फार्म हैं जहां से इस बीमारी के पानी के जरिए आबादी तक पहुंचने की आशंका है। यही कारण है कि आबादी को बीमार होने से बचाने के लिए आसपास दूषित पानी की जांच और निगरानी बहुत जरूरी है।