जेजेएम के आंकड़ों का विश्लेषण से सामने आता है कि देश के बड़े राज्य ही सरकार के लक्ष्य को धीमा कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश 2021-22 के लिए अपने लक्ष्य का केवल 8.3 फीसदी ही कवर करने में सक्षम था और इसने 78 लाख के अपने लक्ष्य की तुलना में 650,384 कनेक्शन लगाए। राजस्थान ने 501,462 परिवारों को कवर किया (जबकि लक्ष्य 30 लाख का था)। केरल ने 29 लाख के अपने लक्ष्य के मुकाबले 622,942 घरों को कवर किया।
छह राज्यों ने सभी परिवारों को दिया नल कनेक्शन
रोजाना लगाए जाने वाले पाइप कनेक्शन के मामले में पंजाब बड़े सूबों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य साबित हुआ है। जहां प्रत्येक 10 लाख लोगों के घरों पर औसतन 694 कनेक्शन थे। असम में प्रत्येक 10 लाख परिवारों पर औसतन 678 पानी के कनेक्शन थे। वहीं उत्तर प्रदेश में 2021-22 में प्रत्येक 10 लाख परिवारों पर पानी का 68 कनेक्शन, जबकि इसी लिहाज से राजस्थान में 133 और झारखंड में 193 पानी का कनेक्शन भी शामिल हैं। देश ने 24 मार्च तक 48 फीसदी परिवारों को कवर किया है। वहीं पांच राज्यों, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर प्रदेश ने एक-चौथाई से भी कम कवर किया था। वहीं छह राज्य सभी परिवारों को नल का कनेक्शन देने में सफल रहे थे।
संसद की एक स्थायी समिति की रिपोर्ट से पता चलता है कि भले ही पेयजल और स्वच्छता विभाग ने 91,258 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन इसे वर्ष 2022-23 के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। जेजेएम 2021-22 में मुश्किल से आधे लक्ष्य को कवर कर सका। वहीं 50,000 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले, सरकार ने जनवरी 2022 तक 28,238 करोड़ रुपये खर्च किए थे। ऐसे में वर्ष 2022-23 के लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।