प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' कैंपेन को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में अनोखी पहल की है। रक्षा मंत्रालय ने विदेश से आयात करने के बजाए आर्मी मिसाइल कॉन्ट्रेक्ट रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को देने का निर्णय लिया है। डीआरडीओ के साथ यह करार लगभग 18,000 करोड़ रुपये का होगा।
मेल टुडे के मुताबिक शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि पिछले हफ्ते रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी ) की महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने लिया है।
सूत्रों ने कहा कि डीएसी बैठक में चर्चा के दौरान शॉर्ट रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल्स (एसआरएसएएम) के अधिग्रहण का मामला उठा था। सरकार को तय करना था विदेशी मिसाइल सिस्टम आयात करें या फिर स्वदेशी आकाश सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम इस्तेमाल करें। रक्षा मंत्री जेटली ने स्वदेशी विकल्प चुना।
सेना के शीर्ष सूत्रों ने पुष्टि की है कि इन्हें पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा। सेना आकाश मिसाइलों का इस्तेमाल दुश्मनों की ओर से आने वाले विमानों और मानव रहित ऐरियल वीहिकल के खिलाफ संरक्षण के लिए करेगी।