'अपने देश में पालन नहीं करते, हमें ज्ञान बांटते हैं..'
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत किसी (देश) को यह नहीं बताया कि उसे क्या करना चाहिए और यही शिष्टाचार भारत के साथ भी होना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, पश्चिम अक्सर भारत को सलाह देता है। जयशंकर से जब पूछा गया कि यूरोप से भारत की क्या अपेक्षा है, तो उन्होंने कहा, हमें साझेदारों की जरूरत है, उपदेशकों की नहीं। खासकर ऐसे उपदेशक जो अपने देश में पालन नहीं करते, लेकिन बाहर ज्ञान बांटते हैं।
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'मजबूत संबंध के लिए आपसी हितों की भावना जरूरी'
उन्होंने कहा, यूरोप अब वास्तविकता की जमीन पर उतर रहा है। कुछ देश इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और कुछ अभी भी पीछे हैं। अगर भारत को यूरोप के साथ मजबूत साझेदारी बनानी है, तो समझदारी, संवेदनशीलता और आपसी हितों की भावना जरूरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने इस बात को दोहराया कि भारत किसी पक्ष के साथ नहीं है। लेकिन युद्ध का समाधान तभी निकलेगा, जब रूस को वार्ता में शामिल किया जाए। जयशंकर ने कहा कि दुनिया आज आपस में जुड़ी हुई है और कोई भी युद्ध सभी के लिए नुकसान लेकर आता है। इसलिए भारत ने हमेशा बातचीत और यथार्थवादी (हकीकत वाले) दृष्टिकोण को अपनाया है।
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