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Jaishankar South Korea Visit: जयशंकर का पश्चिम पर तंज, कहा- बढ़त में कमी पचा ही नहीं पा रही ताकतें

Fri, 26 Jun 2026 03:25 AM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, सिओल

सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिओल में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रीचो ह्यून से मुलाकात की। उन्होंने व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और संस्कृति समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। 

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दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ह्यून और एस जयशंकर - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के जेजू फोरम को संबोधित करते हुए वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े बदलावों पर चिंता व आशा दोनों जताईं। उन्होंने इशारों-में पश्चिम पर निशाना साधते हुए कहा, कुछ स्थापित ताकतें अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में आई कमी को पचा नहीं पा रही हैं। इस कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को जीरो-सम गेम के नजरिये से देखा जाने लगा है, जहां एक देश की प्रगति को दूसरे का नुकसान माना जाता है।

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जयशंकर ने कहा कि गैर-बाजार कारकों के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वाभाविक विकास को बाधित किया जा रहा है, जिससे विकासशील देशों की औद्योगिक क्षमता और बाजार तक पहुंच सीमित हो रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि दुनिया अब एकजुट नहीं रही, बल्कि अलग-अलग शक्ति केंद्रों में बंट रही है। हालांकि, इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा सकता, क्योंकि इससे किसी एक देश का दबदबा कम होता है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक संतुलित तथा लोकतांत्रिक बनती है।

तकनीक क्षेत्र बना रणनीतिक हितों का अखाड़ा...
जयशंकर बोले, आज दुनिया तकनीक, व्यापार व आपूर्ति शृंखलाओं के जरिये पहले से अधिक जुड़ी हुई है, फिर भी प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। तकनीक क्षेत्र अब सियासी अखाड़ा बन चुका है। ऐसे में नियम जब अपने पक्ष के नहीं होते तो भरोसा डगमगा जाता है।
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महामारी, आतंक पर सहयोग जरूरी
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, कुछ देशों के हितों को खुले तौर पर प्राथमिकता दिए जाने से व्यापक समुदाय पर उसका असर पड़ता है और कुछ देशों पर कम विचार किया जाता है, जिसे अधिक सहयोग के माध्यम से संतुलित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महामारी, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे किसी भी सीमाओं में बंधकर नहीं रहते, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर तरह से सहयोग अनिवार्य है।

पांच सूत्रीय सुझाव भी दिए
सहयोग को पुनर्परिभाषित करने के लिए जयशंकर ने पांच सूत्रीय सुझाव भी दिए। इनमें अर्थव्यवस्था को जोखिम-मुक्त करना, आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना, अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मजबूत करना, प्रभावशाली देशों के बीच नए सहयोग तंत्र विकसित करना और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार करना शामिल है। उन्होंने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच साझेदारी को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा, जहाज निर्माण, डिजिटल तकनीक, रक्षा व अवसंरचना का सामना किया जा सकता है।

पोत निर्माण और रक्षा पर सहयोग को जरूरी बताया
जयशंकर ने कहा, भारत और दक्षिण कोरिया को पोत निर्माण, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक घनिष्ठ सहयोग करना चाहिए। वह दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप पर आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026 को संबोधित कर रहे थे। वह बोले- भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक-तकनीकी साझेदारी, राजनीतिक-रणनीतिक सहयोग एवं जन संपर्क को और मजबूत करने की आज के समय में सर्वाधिक आवश्यकता है।

इससे पहले, विदेश मंत्री जयशंकर ने बुधवार को सिओल  में अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और पी2पी (पीपल-टू-पीपल) क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।

कई मुद्दे पर हुई चर्चा
दोनों ने स्टार्टअप्स, फिनटेक और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा की। मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘विदेश मंत्री चो ह्यून से मिलकर अच्छा लगा। हमारी चर्चा हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के परिणामों पर आधारित थी। हमने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। इसके साथ ही स्टार्टअप, फिनटेक और बहुपक्षीय मंचों में अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।'

कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने कहा कि पिछले वर्ष अप्रैल में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा ने भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में गति दी थी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और वित्त जैसे क्षेत्रों में पिछले शिखर सम्मेलन में तय किए गए फैसलों के तेजी से क्रियान्वयन की समीक्षा की और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

जल्द गोलमेज बैठक आयोजित की जाएगी
चो ह्यून ने एक्स पर लिखा, 'इस सप्ताह भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय कोरिया वीक की मेजबानी कर रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें भारतीय बाजार में आने वाली कंपनियों की चुनौतियों के समाधान तलाशने की बात कही गई थी। उन्होंने भारत के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि जल्द ही कोरिया में भारतीय कंपनियों के लिए भी इसी तरह की राउंडटेबल आयोजित की जाएगी।'

उन्होंने यह भी बताया कि लंच के दौरान उन्होंने और जयशंकर ने वैश्विक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की और पश्चिम एशिया की स्थिति से उत्पन्न आर्थिक प्रभावों पर मिलकर प्रतिक्रिया देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश निकट संपर्क बनाए रखेंगे। अपने शुरुआती संबोधन में जयशंकर ने कहा, 'सोल लौटना और अपने समकक्ष से मिलना मेरे लिए खुशी की बात है। यह बैठक समयानुकूल है क्योंकि हाल ही में राष्ट्रपति स्तर की यात्रा हुई है। वहीं,  दुनिया की वर्तमान परिस्थितियों में भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का महत्व और बढ़ गया है।'

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह चो ह्यून से न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर, वाशिंगटन, जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान मिल चुके हैं। जयशंकर ने कहा कि आज विदेश मंत्रियों की जिम्मेदारी है कि वे इस संबंध को आगे बढ़ाएं और विभिन्न सरकारी और आर्थिक क्षेत्रों के बीच सहयोग को समन्वित करें ताकि एक अधिक आधुनिक और भविष्य उन्मुख साझेदारी विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया समान विचारधारा वाले, साझा मूल्यों वाले और पारस्परिक विश्वास रखने वाले देशों के सहयोग की मांग करती है। वहीं, हालिया उच्च स्तरीय बैठकों ने इस दिशा में मार्गदर्शन दिया है।

 

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