जैश के आतंकी विभिन्न तरह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करते थे, जैसे कि तीन महीने का एडवांस कॉम्बैट कोर्स (दौरा ए खास), एडवांस आर्म्ड ट्रेनिंग कोर्स (दौरा अल राद) और रिफ्रेशर कोर्स। बालाकोट में आतंकवादियों को एके 47, पीका, एलएमजी, रॉकेट लांचर, यूबीजीएल और ग्रेनेड जैसे हथियार चलाना सिखाया जाता था। संदेह है कि यह शिविर मदरसा आयशा सादिक की आड़ में चल रहा था।
अधिकारी ने बताया कि हथियारों के संचालन में बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा आतंकवादियों को जंगल में जीवित रहने, घात लगा कर हमला करने, संचार, जीपीएस, नक्शा पढ़ना आदि की भी जानकारी दी जाती थी। इन आतंकवादियों को तैराकी, तलावरबाजी और घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जाता था।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण की अवधि के दौरान इंडियन एयरलाइंस की उड़ान (आई सी - 814) को अगवा कर जैश द्वारा कंधार ले जाए जाने की घटना जैसा वीडियो दिखा कर आतंकियों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया जाता था।
उन्हें मुसलमानों के खिलाफ कथित अत्याचार, गोधरा बाद के दंगों पर ‘हां मैंने देखा है गुजरात का मंजर’ नाम का वीडियो और बाबरी मस्जिद ढहाने जाने से जुड़े भाषणों का वीडियो दिखाया जाता था। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुन्हार नदी के तट पर स्थित शिविर का इस्तेमाल एक अन्य आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन भी करता था।