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जम्मू-कश्मीर आतंकी हमला: आखिर कब तक बुझते रहेंगे घरों के चिराग, बच्चे यतीम और पत्नियां होंगी विधवा ?

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पूरे देश में एक बार फिर आतंक को लेकर गुस्सा और आक्रोश है, साथ ही सवाल भी कि आखिर कब तक
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 42 जवानों के शहीद होने की खबर है और 40 से ज्यादा घायल हुए हैं। पूरे देश में एक बार फिर आतंक को लेकर गुस्सा और आक्रोश है, साथ ही सवाल भी कि आखिर कब तक जम्मू-कश्मीर में हमारे सैनिक शहीद होते रहेंगे, बच्चे यतीम और विधवा होती रहेंगी सैनिकों की पत्नियां। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि सैनिकों की शहादत को हिंदुस्तान कब तक सहता रहेगा? और पाकिस्तान पीठ पीछे से इस तरह के कायराना हमले करता रहेगा, क्या पाक को उसके इस नापाक हरकत के लिए सबक नहीं मिलना चाहिए? नहीं होनी चाहिए एक और सर्जिकल स्ट्राइक।

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नम आंखों से शहीदों के परिवारों के लिए घर-घर दुआएं हो रही हैं। युवा कवि राधाकांत पांडे कहते हैं-
 
परिवार दांव पे लगाया
खुद देश हेतु
यह भाव भरने की सोच के भी देखना
गोलियोंं के आगे सीना तान के खड़े हों ऐसे
हद से गुजरने की सोच के भी देखना
आज तक आप जो संभाले रहे कभी उस
घर के बिखरने की सोच के भी देखना
रूह कांप जाएगी तुम्हारी बस एक बार
बलिदान करने की सोच के भी देखना


इस कायराना आतंकी हमले से देश के सारे नौजवान आक्रोशित हैं। भाव विहल होकर राधाकांत कहते हैं कि आतंकवादी कायर हैं और जो कायर होता है वो पीठ पीछे से ही वार करता है। लेकिन, इससे हमारे जवानों का जज्बा कम नहीं होने वाला और जरूरत पड़ी तो देश के सारे नौजवान अपनी पूरी जवानी मां भारती के चरणों में अर्पित कर देंगे।

जो कायर हैं
भला क्या पाठ साहस का पढ़ाएंगे
विजेता शौर्य पथ के हम
कदम अपने बढ़ाएंगे
जरूरत हो तो माटी के लिए अपनी जवानी को
बनाकर पुष्प चरणों में स्वयं मां के चढ़ाएंगे


राधाकांत की ही तरह देश के कई युवाओं का कहना है कि यह बात सही है कि युद्ध शांति का विकल्प नहीं है, हिंसा से हल नहीं निकलता..। लेकिन क्या यह बात ध्यान रखने की नहीं है कि सीमा पार हमारे भाई, हमारे जवान, किसी मां का इकलौता चिराग, बुढे़ बाप का सहारा ऐसे ही शहीद होते रहेंगे, क्या सीमा पार बैठे आंतकवादियों को  कड़ा जवाब नहीं दिया जाना चाहिए..
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यह कायराना हमला जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा के गोरीपोरा इलाके में हुआ है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सीआरपीएफ जवानों को उस वक्त निशाना बनाया जब उनका काफिला जम्मू-कश्मीर जा रहा था। काफिले में सैनिकों के 70 वाहन थे। 

सेना के ऑपरेशन से बौखलाहट में थे आतंकी
जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सैनिकों के काफिले पर गोलीबारी करने के साथ ही कार के जरिए आत्मघाती हमला किया। आईआईडी ब्लास्ट में 40 सैनिक शहीद हो गए। यह आतंकी हमला सितंबर 2016 में ऊरी में हुए हमले से भी बड़ा बताया जा रहा है। आत्मघाती हमले के पीछे जैश के आतंकी आदिल अहमद डार के हाथ होने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में सेना के ऑपरेशन से आतंकी बौखलाए हुए थे, मौका पाकर उन्होंने सेना के काफिले पर कायरानाम आत्मघाती हमला कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने सेना के जवानों पर इस तरह का फिदायनी हमला किया है। इससे पहले 2001-2002 में भी आतंकियों ने इसी तरह का फिदायनी हमला किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा- व्यर्थ नहीं जाएगा सैनिकों का बलिदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना के काफिले पर हुए इस आत्मघाती हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा कि सैनिकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा देश शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ कंधे  से कंधा मिलाकर खड़ा है। इस आत्मघाती आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनएसए अजीत डोबाल से बातचीत की है। एनआईए की टीम कल सुबह घटनास्थल के लिए रवाना होगी और आतंकी हमले की फॉरेंसिक जांच करेगी।

आतंकियों को सबक सिखाने की मांग
इस आतंकी हमले के बाद देश के अलग-अलग कोने से आतंकियों को सबक सिखाने की मांग होने लगी है। लोगों का सवाल है कि आखिर कब तक हिंदुस्तान आतंकियों के ऐसे नापाक हमले को सहता रहेगा। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कहना है कि आतंक के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कहना है कि सरकार आतंकी हमले को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। उन्होंने कहा कि वो शहीदों के परिवारों का दुख समझती है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस कायरानाम हमले की घोर निंदा की है और साथ ही आतंकियों पर कार्रवाई की बात भी कही है। संघ ने शहीद परिवारों के प्रति अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है।

सैनिकों की शहादत कब तक?
जैश-ए-मोहम्मद के इस कायरानाम हमले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, हर भारतीय घरों में शोक की लहर के साथ ही आक्रोश है। साथ ही एक सवाल भी कि आखिर कब तक सैनिकों की शहादत होती रहेगी। 
 

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