Congress On Inflation: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से पूछा है कि किसानों को वित्तीय सहायता देने के समय भी महंगाई के बारे में वे कब सोचेंगे?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणी का हवाला देते प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। बता दें कि, उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि किसानों को सहायता करते समय महंगाई पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही धनखड़ ने अमेरिकी पैटर्न के आधार पर किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की वकालत भी की थी। उन्होंने मांग की थी कि विधायकों और सांसदों के वेतन की तरह किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करते समय महंगाई को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति धनखड़ की टिप्पणी
ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांसद और विधायक को वेतन बढ़ाने के समय महंगाई का ध्यान रखा। तो किसानों के लिए क्यों नहीं सोचा जाता? किसानों को वित्तीय सहायता देने के समय भी महंगाई के बारे में सोचना चाहिए।
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जयराम रमेश ने पूछा- मोदी ऐसा कब करेंगे?
वहीं इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि ग्वालियर में कल उपराष्ट्रपति ने कहा था कि पीएम मोदी सांसदों और विधायकों के वेतन बढ़ने के समय महंगाई का ध्यान रखते है, तो किसानों को वित्तीय सहायता देने के समय भी महंगाई के बारे में सोचना चाहिए। इस पर उन्होंने पूछा कि वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ऐसा कब करेंगे?
किसानों को बिना बिचौलिए के मिले सब्सिडी- धनखड़
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने उर्वरक सब्सिडी में डीबीटी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अमेरिका में किसानों को सीधे सहायता दी जाती है। बिचौलियों के माध्यम से नहीं। जैसे भारत में पीएम-किसान योजना है। वैसे ही भारत सरकार भी उर्वरक सब्सिडी पर भारी खर्च करती है। उन्होंने कहा कि यह अब चिंतन और शोध दोनों का विषय है। अगर यह धनराशि सीधे किसानों को दी जाए, तो भारत में प्रत्येक किसान परिवार को कम से कम 30,000 रुपये प्रति वर्ष मिल सकते हैं। यह राशि सीधे उन्हें दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में जब सरकार उर्वरक सब्सिडी प्रदान करती है, तो किसान वास्तव में इसका प्रभाव महसूस नहीं कर पाते हैं।