देशभर में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। सभी राजनीतिक दल बढ़-चढ़कर प्रचार प्रसार कर रहे हैं। चुनाव को देखते हुए सियासी गलियारों में लगातार हलचल मची हुई है। एक तरफ भाजपा 400 पार के नारे लगा रहा है। वहीं इंडी गठबंधन पर प्रधानमंत्री के चेहरे को लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अब सबसे पुरानी पार्टी के एक नेता ने साफ कर दिया है कि आखिर विपक्षी गठबंधन जीतता है तो कौन पीएम बनेगा और इसे तय करने में कितना समय लगेगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि इंडी गठबंधन को लोकसभा चुनावों में निर्णायक जनादेश मिलेगा और प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार तय करने में 48 घंटे से भी कम समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यह सही है कि गठबंधन में जिस पार्टी को अधिकतम सीटें मिलेंगी, वह नेतृत्व का स्वाभाविक दावेदार होगा।
बहुमत के लिए जरूरी सीटें मिलेंगी
सात चरणों में हो रहे लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) को निचले सदन में बहुमत के लिए जरूरी 272 से अधिक सीटें मिलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इंडिया जनबंधन पार्टी को जनादेश मिलेगा, तब एनडीए के कुछ दल गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर करेंगे। हालांकि, उस समय कांग्रेस आलाकमान को फैसला करना होगा कि उन्हें गठबंधन में शामिल करना है या नहीं।
नीतीश कुमार पलटी के उस्ताद
यह पूछे जाने पर कि क्या चुनाव के बाद जदयू प्रमुख नीतीश कुमार और टीडीपी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू जैसे एनडीए के सहयोगियों के लिए दरवाजे खुले रहेंगे, कांग्रेस नेता ने कहा, 'नीतीश कुमार पलटी के उस्ताद हैं। नायडू 2019 में गठबंधन में कांग्रेस के साथ थे। मैं कहूंगा कि जब इंडिया जनबंधन पार्टी को जनादेश मिलेगा, तब न केवल इंडिया पार्टियां बल्कि एनडीए के कुछ दल भी गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।'
उन्होंने कहा, 'कांग्रेस आलाकमान खरगे, राहुल और सोनिया को फैसला करना होगा कि उन्हें इंडिया ब्लॉक में शामिल किया जाए या नहीं।'
इंसानियत और ईमानदारी का अंतर
रमेश ने कहा कि इंडिया और एनडीए के बीच दो 'आई' का अंतर है। यानी इंसानियत और ईमानदारी का। जिन दलों में ईमानदारी और इंसानियत है, लेकिन वे एनडीए में शामिल हैं, वे इंडिया दलों में शामिल होंगे। उन्होंने आगे कहा कि जनादेश मिलने के बाद गठित इंडिया ब्लॉक सरकार 'सत्तावादी' होगी न कि 'निरंकुश'।
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम बड़ी संख्या में दिल जीतेंगे। कोई बदले की राजनीति नहीं, प्रतिशोध की राजनीति नहीं। दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल जा रहे हैं और दो दिनों के लिए ध्यान करेंगे। वही विवेकानंद स्मारक जहां से राहुल गांधी ने सात सितंबर, 2022 को भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी। मुझे यकीन है कि वह (मोदी) इस बात पर ध्यान देने जा रहे होंगे कि सेवानिवृत्ति के बाद जीवन कैसा होने वाला है।'
निर्णायक बहुमत मिलेगा
छह चरणों के मतदान के बाद जमीनी राजनीतिक स्थिति के आकलन के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा, 'मैं संख्या में नहीं जाना चाहता, लेकिन मैं बस इतना कह रहा हूं कि हमें (इंडिया ब्लॉक) स्पष्ट और निर्णायक बहुमत मिलेगा। 273 स्पष्ट बहुमत है लेकिन यह निर्णायक नहीं है। जब मैं स्पष्ट और निर्णायक कहता हूं, तो मेरा मतलब 272 सीटों से ऊपर है।'
उन्होंने दावा किया कि 2004 का नतीजा, जब कांग्रेस ने भाजपा के 'इंडिया शाइनिंग' अभियान के बावजूद गठबंधन सरकार बनाने के लिए चुनाव जीता था, वह 2024 में खुद को दोहराएगा। कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र में अच्छी बढ़त हासिल करेगी।
उन्होंने कहा, 'हम छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और असम में अपनी स्थिति सुधारेंगे। कुल मिलाकर हम 2004 जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस को फायदा होगा और भाजपा 2019 के अपने 62 के आंकड़े में सुधार नहीं कर सकती। इसके अलावा भाजाप बिहार और बंगाल में भी ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा पाएगी।'
एक जून को बैठक?
इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों की एक जून की बैठक के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन इंडिया ब्लॉक के नेता निश्चित तौर पर मुलाकात करेंगे।
उन्होंने कहा, '2004 में चुनाव परिणाम 13 मई को आए और यूपीए का गठन 16 मई को हुआ था। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह का नाम 17 मई को सामने आया था। डॉ. सिंह का नाम सामने आने में तीन दिन से भी कम समय लगा, हालांकि हर कोई जानता था कि पीएम डॉ. सिंह ही बनने वाले हैं क्योंकि सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे, जो उनकी ओर से एक बड़ा बलिदान था।'
उन्होंने कहा, 'लेकिन इस बार मुझे नहीं लगता कि पीएम का चयन करने में 48 घंटे भी लगेंगे। कुछ ही घंटों में जनबंधन का नेता चुन लिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जिस पार्टी को 'जनबंधन' में सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी, वह जनबंधन के नेतृत्व के लिए एक स्वाभाविक दावेदार होगी।'
यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस के इंडिया ब्लॉक में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी होने की संभावना है, रमेश ने कहा, 'आप मेरे बयान की किसी भी तरीके से व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन तथ्य यह है कि जनबंधन में सभी दल सरकार में भाग लेने जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जिस पार्टी के पास सबसे अधिक सीटें हैं, वह संसद में उस जनबंधन का नेतृत्व करने जा रही है।'
यह पूछे जाने पर कि मल्लिकार्जुन खरगे, शरद पवार और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं के इस धड़े में होने के बीच क्या प्रधानमंत्री पद के चयन पर आम सहमति बनाना आसान होगा, कांग्रेस नेता ने कहा कि गठबंधन का नारा 'मैं नहीं हम, मेरा नहीं हमारा' है।
इतने बड़े गठबंधन स्थिरता के लिए अच्छे नहीं?
आलोचकों के इस दावे पर कि इतने बड़े गठबंधन स्थिरता के लिए अच्छे नहीं हो सकते हैं, रमेश ने कहा कि मनमोहन सिंह का 10 साल तक यूपीए गठबंधन सरकार चलाना इसका सर्वश्रेष्ठ प्रमाण है। उन्होंने कहा, 'हम एक स्थिर, पारदर्शी, उत्तरदायी और जिम्मेदार सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
जयराम रमेश ने कहा कि एक 'जनबंधन पीएम' होगा जो अर्थव्यवस्था को ठीक करेगा। भाजपा की नीति थी 'अन्नदाताओं का अपमान और चंदाताओं का सम्मान'। वह बदल जाएगा।