कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को सत्ता पक्ष का खिलाड़ी बताते हुए उन्हें पद से हटाने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने और क्या-क्या कहा है? खबर में जानिए...
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला है। रमेश ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग अब तक का सबसे अधिक समझौतावादी निकाय बन गया है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में सीईसी ने एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक के बजाय एक 'खिलाड़ी' की भूमिका निभाई है।
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विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं- जयराम रमेश
कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए उनके प्रयास जारी रहेंगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश में वोट देने का अधिकार खतरे में है। रमेश ने मांग की कि मतदान के अधिकार को केवल संविधानिक अधिकार न रखकर एक मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के संदर्भ में की। इस प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में लाखों नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
विपक्ष ने हाल ही में राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दूसरा नोटिस दिया है। इससे पहले दिए गए पहले नोटिस को दोनों सदनों के सभापतियों ने खारिज कर दिया था। रमेश ने ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, 'चुनाव आयोग कभी इतना समझौतावादी नहीं रहा, जितना ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुआ है।' उन्होंने आरोप लगाया कि यह गिरावट कुमार के पूर्ववर्ती के कार्यकाल से ही शुरू हो गई थी।
चुनाव आयोग से चुनाव लड़ रही है कांग्रेस-जयराम रमेश
रमेश के अनुसार, कांग्रेस केवल राजनीतिक विरोधियों से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से भी चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में दिए गए नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जब उनसे पूछा गया कि अगर यह नोटिस फिर से खारिज हो जाता है तो विपक्ष क्या करेगा, तो उन्होंने कहा, 'हम तब तक उनके खिलाफ जाते रहेंगे जब तक उन्हें हटा नहीं दिया जाता।'
इस बीच अमित शाह ने लद्दाख दौरे पर तंज कसते हुए रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग को अपनी धुन पर नचाने के बाद वहां आराम करने गए हैं। रमेश ने चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को भी एक रैकेट करार दिया। उन्होंने कहा कि 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने सिद्ध कर दिया था कि ये सर्वे अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं।