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जयपुर चिंतन शिविर: अगले 25 वर्षों के लिए क्या होगा भाजपा का लक्ष्य, पीएम मोदी के सपने को कैसे साकार करेगी पार्टी?

सार

भाजपा थिंक टैंक के एक विचारक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है। 2014 में 282 सीटों के साथ और 2019 में 303 लोकसभा सीटों के साथ भाजपा ने एतिहासिक बहुमत हासिल किया है। लेकिन सांप्रदायिकता और क्षेत्रीय अलगाववाद देश के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है...
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जयपुर चिंतन शिविर- भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में बोलते पीएम मोदी - फोटो : Agency
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विस्तार
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जयपुर चिंतन शिविर के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी को अगले 25 वर्षों के लिए अपना लक्ष्य तय करना चाहिए। प्रधानमंत्री उस समय के लिए भाजपा का लक्ष्य तय करने की बात कर रहे हैं जब देश आजादी 100वीं सालगिरह मना रहा होगा। भाजपा का यह लक्ष्य क्या हो सकता है? अपनी आने वाली राजनीतिक पीढ़ी के लिए आखिर प्रधानमंत्री मोदी कौन सा लक्ष्य तय करना चाहते हैं?

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वरिष्ठ पत्रकार बलबीर पुंज ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा के संस्थापकों ने पार्टी की स्थापना के समय से ही पार्टी के लिए इतना विराट लक्ष्य तय किया है कि उसमें पूरे राष्ट्र का सार्वकालिक कल्याण निहित है। इसमें समाज के हर वंचित तबके को मानवीय गरिमा के साथ सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अधिकार उपलब्ध कराना और देश में सामाजिक समरसता का लक्ष्य हासिल करना शामिल है। इसके साथ ही पार्टी संस्थापकों ने भारत को वैश्विक पटल पर एक उच्च स्थान दिलाने का महान लक्ष्य भी तय किया था।

 

बलबीर पुंज के मुताबिक यदि प्रधानमंत्री मोदी के आठ साल के शासनकाल को ध्यान से देखें तो सरकार का हर कदम इस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता दिखाई देता है। आईएमएफ के अनुसार सरकार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से देश की गरीबी लगभग आधा करने में सफलता पाई है। अति गरीबों की संख्या एक फीसदी से भी कम रह जाना समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण की तरफ बढ़ता हुआ कदम दिखाई पड़ता है। 30 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते खुलवाकर बिना एक पैसा गलत हाथों में पड़े करोड़ों गरीब लोगों तक सीधे आर्थिक मदद पहुंचाना समाज के अंतिम व्यक्ति को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया मजबूत प्रमाण है।

सबको साथ लेने की कोशिश

भाजपा से दो बार सांसद रहे बलबीर पुंज ने कहा कि आजादी के समय से अभी तक देश में जाति और धर्म की राजनीति की जाती रही। राजनीतिक दलों में समाज को अलग-अलग वर्गों में बांट कर उनका वोट हासिल करने की होड़ लगी रही। इससे समाज में आपसी अविश्वास बढ़ा जिसका राष्ट्र को नुकसान हुआ। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने यह साबित कर दिया कि समाज को तोड़े बिना भी राजनीतिक सफलता हासिल की जा सकती है। भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए देश के सभी वर्गों का भी तालमेल होना बेहद आवश्यक है। इसके बिना कोई राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षितिज पर नहीं चमक सकता। कहना होगा कि केंद्र के प्रयास इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आंतरिक चुनौती का लक्ष्य

भाजपा थिंक टैंक के एक विचारक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है। 2014 में 282 सीटों के साथ और 2019 में 303 लोकसभा सीटों के साथ भाजपा ने एतिहासिक बहुमत हासिल किया है। आज देश के 18 राज्यों में पार्टी की सरकार है। यह केवल इसलिए संभव हुआ है क्योंकि समाज के एक बड़े वर्ग में उसके प्रति विश्वास पैदा हुआ है। लेकिन सांप्रदायिकता और क्षेत्रीय अलगाववाद देश के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। पार्टी को सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी इस दिशा की तरफ कदम उठा चुके हैं। वे सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की वकालत करते हैं, लेकिन हाल की सांप्रदायिक घटनाएं साबित करती हैं कि इस दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। भाजपा इस दिशा में अपने लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख मजबूत

बलबीर पुंज बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मोदी सरकार ने भारत की साख मजबूत करने में सफलता पाई है। यदि मुस्लिम देशों के बीच भी पाकिस्तान को भारत के संदर्भ में समर्थन हासिल नहीं हो पाता, तो इसका श्रेय केवल मोदी सरकार के प्रयासों को ही दिया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में दुनिया का भारत की ओर देखना भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी मजबूत होती साख का प्रमाण है। लेकिन केंद्र सरकार जानती है कि सामरिक और ऊर्जा आवश्यकताओं के संदर्भ में अग्रणी हुए बिना वैश्विक शक्ति बनने का सपना अधूरा ही रह सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा आयुध निर्माण में स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा देना इसी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हुआ कदम माना जा सकता है। आज भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए आयुध बना रहा है, बल्कि वह कई देशों को इसका निर्यात भी करने लगा है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज युद्ध तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी के आधार पर लड़ा जा रहा है। भारत अभी भी इस मोर्चे पर काफी पीछे है और उसे अपनी तकनीकी में बहुत सुधार करना है।

नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य लंबा

ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत हुए बिना देश वैश्विक पटल पर अपनी बड़ी भूमिका नहीं देख सकता। लेकिन भारत में जीवाश्म ईंधन के सीमित स्रोत उसे ऊर्जा के पारंपरिक तरीके पर निर्भर रहने की अनुमति नहीं देते। उसके पास अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ लेते हुए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश करना चाहिए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और आणविक शक्ति के उपयोग से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। लेकिन भारत अभी भी अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 10 फीसदी ही नवीकरणीय ऊर्जा से हासिल करता है जबकि जर्मनी जैसे देश इस दिशा में बहुत आगे हैं।

भाजपा के राजनीतिक लक्ष्य

जयपुर चिंतन शिविर में ये बात भी उभर कर आई कि इन बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में देश के राजनीतिक दलों की इच्छाशक्ति बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। केंद्र और राज्य सरकारों के रूप में राजनीतिक दलों की भूमिका देश का भविष्य निर्धारित करने वाली होगी। वर्तमान समय में भाजपा देश की सबसे मजबूत और सबसे बड़ी पार्टी है। वर्तमान राजनीतिक हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि आगे आने वाले समय में भी उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी। सरकार हो या विपक्ष, किसी न किसी रूप से भाजपा देश की नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। भाजपा का अगले 25 वर्षों का राजनीतिक लक्ष्य इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होने वाला ही होना चाहिए।

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