दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भाजपा के सामने बगावत का खतरा कई बार मंडराया, लेकिन पार्टी अब तक इसे संभालने में कामयाब रही है। पार्टी का टिकट न मिलने पर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल करने जा रहे दो उम्मीदवारों को बातचीत कर संभाल लिया गया है, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं होगा, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में पार्टी को कुछ बेहद महत्त्वपूर्ण सीटों पर चुनौती या पार्टी के ही पुराने नेताओं के असहयोग का सामना करना पड़ सकता है।
बगावती नेताओं में नया सुर जयभगवान गोयल का था जो लगातार बाबरपुर या रोहताश नगर विधानसभा सीट से अपने लिए टिकट मांग रहे थे। जयभगवान गोयल ने इस इलाके में अपनी जमीन भी तैयार की थी। वे इस इलाके के साथ-साथ पूरी दिल्ली में एक जाने-पहचाने चेहरे हैं। उन्हें भाजपा की लाइन पर चलने वाले कद्दावर स्थानीय नेताओं में गिना जाता है। लेकिन भाजपा ने इस मजबूत नेता को टिकट देने की बजाय अनिल वशिष्ठ को मैदान में उतार दिया जो इस क्षेत्र के साथ-साथ खुद पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी नए चेहरे हैं।
गोयल समर्थक इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सके और शुक्रवार को उन्होंने जयभगवान गोयल पर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल करने के लिए दबाव डाला। इसके लिए आवश्यक तैयारियां भी कर ली गईं। यदि गोयल चुनाव में उतरते तो वे केवल बाबरपुर ही नहीं, बल्कि पूर्वी दिल्ली की शहादरा, घोंडा, करावल नगर, मुस्तफाबाद जैसी सीटों पर भी असर डालते। कहा जा रहा है कि गोयल के दबाव के कारण ही भाजपा ने इन सीटों पर अंतिम समय तक निर्णय नहीं लिया था।
मनोज तिवारी मनाने पहुंचे
पूर्वी दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों में लगभग एक दर्जन सीटों पर भाजपा अपनी स्थिति मजबूत मानकर चल रही है। उसके नेताओं का कहना है कि वे इनमें से लगभग एक दर्जन सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं। लेकिन जयभगवान गोयल जैसे नेता का बागी होने से भाजपा को कई सीटों पर नुकसान हो सकता था।
यही कारण है कि इस नुकसान की आशंका भांपकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी उन्हें मनाने पहुंचे। उनके साथ-साथ विहिप के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंघल ने भी गोयल को समझाया। इसके बाद गोयल ने पार्टी की बात मानते हुए पर्चा दाखिल न करने की बात मानी। हालांकि, इसके बाद भी इसका कुछ नुकसान भाजपा को हो सकता है।
बिष्ट मान गए, लेकिन समर्थक?
सबसे पहले करावल नगर से टिकट कटने के बाद पांच बार के विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने बागी होने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी किसी को भी टिकट देकर यदि जीत हासिल करने का सपना देख रही है तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यहां तक घोषणा कर दी थी कि इसका असर पांच से सात विधानसभा क्षेत्रों में सुनाई देगा।
पार्टी ने भी अपने इस कद्दावर चेहरे की अहमियत समझते हुए उसी दिन उन्हें मुस्तफाबाद की विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा कर दी। कहा जाता है कि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वयं आगे बढ़कर मोहन सिंह बिष्ट को संभाला और उन्हें टिकट देने का आश्वासन दिया। इसके बाद उसी दिन केवल उनके नाम की एक नई लिस्ट जारी कर बिष्ट की नाराजगी को कम करने की कोशिश की गई।
पार्टी के पुराने सिपाही रहे मोहन सिंह बिष्ट ने फिलहाल भाजपा को हर सीट पर जिताने का प्रयास करेंगे, लेकिन उनके समर्थक अभी भी अपने विधायक को अपने क्षेत्र से हटाने से नाराज हैं। भाजपा को इसका कितना नुकसान होगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा।
अभी और भी खतरे
भाजपा ने जयभगवान गोयल और मोहन सिंह बिष्ट जैसे नेताओं को तो संभाल लिया है, लेकिन कहा जा रहा है कि कुछ सीटों पर कई अन्य नेता भी नाराज हैं। वे खुलेआम बगावत भले न करें, लेकिन चुनाव के अंतिम समय में उनका पूरा सहयोग न मिलने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। पार्टी ने कुछ सीटों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से आए उम्मीदवारों को झटके में टिकट पकड़ा दिया है। इन सीटों पर भी भाजपा को भितरघात का सामना करना पड़ सकता है।