कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच अब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अगर 3 मई के बाद भी देश में लॉकडाउन बढ़ाया जाता है और हालात ठीक नहीं होते हैं तो रथयात्रा पर ग्रहण लग सकता है। अगर ऐसा हुआ तो 284 साल से चली आ रही परंपरा टूटेगी। अभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पुरी में 23 जून को रथयात्रा निकलनी है। अक्षय तृतीया से इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है। इस बीच, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों के संगठन दइतापति निजोग ने लॉकडाउन के बीच रथयात्रा कराने का निवेदन किया है। एक पत्र में संगठन ने कहा, कई बार महामारी में भी रथयात्रा बंद नहीं हुई। ऐसे में पुराने इतिहास को ध्यान में रख इस साल भी रथयात्रा की इजाजत मिलनी चाहिए।
1736 से निकाली जा रही है रथयात्रा
संगठन के सचिव दुर्गादास महापात्र ने बताया कि पत्र में यह भी कहा गया है कि रथयात्रा में शामिल होने वाले लोगों का पहले मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। रथयात्रा में बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया जाएगा। माना जा रहा है कि पुरोहितों और सरकार में मंदिर में ही रथयात्रा कराने की सहमति बने। इस मंदिर में 1736 से लगातार रथयात्रा का आयोजन हो रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा भी इस वर्ष संभव नहीं
कोरोना के चलते कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन अब इस वर्ष संभव नहीं लग रहा है। विदेश मंत्रालय की कैलाश यात्रा को संचालित करने वाली एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के अधिकारियों के साथ न तो कोई बैठक हुई और न ही कोई निर्देश जारी हुए हैं। केएमवीएन के जीएम अशोक जोशी का कहना है कि अब इस साल यह यात्रा संभव नहीं है। कुमाऊं (उत्तराखंड) के लिपुलेख दर्रे से यात्रा वर्ष 1981 में शुरू हुई थी। मंत्रालय से निर्देश मिलने पर केएमवीएन दिल्ली से यात्रा के संचालन के साथ ही यात्रियों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी करता है।