सरकार चीन से लगे 3488 किलोमीटर लंबी सीमा की रखवाली में तैनात इंडो तिबतियन बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) की क्षमता बढ़ाने जा रही है। जल्द ही फोर्स में नौ नई बटालियन शामिल की जाएंगी जिनमें नौ हजार सुरक्षाकर्मी-अफसर तैनात किए जाएंगे। पूर्वोत्तर राज्य में सामरिक महत्व का सेक्टर हेडक्वार्टर स्थापित किया जाएगा। साथ ही 47 नए बॉर्डर आउट पोस्ट बनाए जाएंगे। इसके अलावा लद्दाख और अरुणाचल के 18 आउट पोस्ट की शक्ति बढ़ाई जाएगी। साथ ही 12 पैट्रोलिंग कैंप भी बनाए जाएंगे जिससे सीमाक्षेत्र की निगरानी में आसानी हो।
47 बॉर्डर आउटपोस्ट, 12 पैट्रोल कैंप और सामरिक सेक्टर हेडक्वार्टर की भी होगी स्थापना
बीते महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय में सीमा की निगरानी और सुरक्षा के लिहाज से बढ़ी जरूरतों पर बैठक बुलाई थी। चूंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास चीन की सेना की गतिविधियां बीते कुछ सालों में बढ़ गई हैं, लिहाजा अग्रिम चौकियों पर तैनात आईटीबीपी फोर्स के लिए नई चौकियों और अधिक सुरक्षाबल की जरूरत महसूस की जा रही थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अगले महीने मंजूरी के बाद नई बटालियनों के लिए नई भर्ती शुरू की जाएगी। साथ ही निचले स्तर के 6000 पदों के लिए भी भर्ती शुरू कर दी जाएगी। नया सेक्टर हेडक्वाटर संभवत: अरुणाचल प्रदेश में स्थापित किया जाएगा जिसकी कमान डीआईजी रैंक के अफसर को दी जाएगी। 12 निगरानी चैकियां बर्फीले हिमालयी क्षेत्र में स्थापित होंगी जो अस्थाई तौर पर बार्डर आउट पोस्ट का भी काम करेंगे।
आईटीबीपी चाहती है कि आउट पोस्ट के बीच की दूरी कम की जाए जिससे फोर्स का मूवमेंट बेस से चौकियों तक बढ़ाया जा सके। वर्तमान में आईटीबीपी में 90 हजार जवान-अफसर हैं जो नौ हजार से लेकर 14 हजार की ऊंचाई वाले साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी में तैनात हैं।