केंद्र सरकार एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। साथ ही सरकार इसे न्यायिक समीक्षा से अलग रखने के लिए संसद के मानसून सत्र में एक विधेयक लाने पर भी विचार कर रही है। इस बिल के जरिए एससी/एसटी एक्ट को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा। इस अनुसूची में आने के बाद एक्ट को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले पर 16 मई को सुनवाई होनी है। सरकार का अगला कदम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा। अपील के खारिज होने पर सरकार अध्यादेश के जरिए इस साल मार्च में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देगी और पहले के प्रावधानों को अमल में लाएगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते सरकार को देशभर में विपक्षी दलों के साथ दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।