देश में सस्ती और गुणवत्ता युक्त मेडिकल शिक्षा व्यवस्था लाने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय मेडिकल आयोग बिल को मंजूरी दे दी, बहुत जल्द इसे गजेट में भी अधिसूचित कर दिया जाएगा। बिल को संसद की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, अधिसूचित होने के बाद नियम तैयार किए जाएंगे और अगले छह महीने में राष्ट्रीय मेडिकल आयोग का गठन हो जाएगा।
उन्होंने कहा, केंद्र सरकार का यह फैसला देश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा जिसके दूरगामी फायदे होंगे। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, आयोग के गठन के बाद मेडिकल शिक्षा की फीस कम हो जाएगी, विद्यार्थियों का बोझ कम होगा और ईमानदारी व गुणवत्ता बढ़ेगी। मेडिकल में दाखिले की तमाम जटिलताओं से भी छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अधिक लोगों तक होगा। एनएमसी एक व्यापक निकाय होगा, जो मेडिकल शिक्षा के लिए नीतियां बनाएगा और चार स्वायत्त बोर्डों की गतिविधियों का समन्वय करेगा।
विरोध कर रहे डॉक्टरों की सभी दुविधाएं दूर
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एनएमसी बिल को लेकर देश भर में विरोध कर रहे जूनियर व आवासीय डॉक्टराें के मन में अब कोई दुविधा नहीं रह गई है। उन्होंने कहा, मैंने डॉक्टरों से बात कर उनकी सभी शंकाओं को दूर कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में एनएमसी अपने लक्ष्य को हासिल करेगा।