घरेलू खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा
सीतारमण ने कहा, नई दरों से मध्य वर्ग के करों में काफी कमी आएगी। उनके हाथों में अधिक पैसा बचेगा, जिससे घरेलू खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह वह बजट है जो लोग चाहते थे।
प्रत्यक्ष कर को सरल बनाने पर भी जोर था
वित्त मंत्री ने कहा, एक विचार प्रत्यक्ष कर को सरल और अनुपालन में आसान बनाना था। जुलाई, 2024 के बजट में इस पर काम शुरू हुआ और अब एक नया कानून आने वाला है, जो भाषा को सरल बनाएगा। अनुपालन बोझ को कम करेगा और थोड़ा अधिक यूजर्स अनुकूल होगा। कई वर्षों से हम उन तरीकों पर विचार कर रहे हैं, जिनसे दरें करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल हो सकती हैं।
मध्य वर्ग की आवाज को हमने सुना
जुलाई के बजट के बाद मध्य वर्ग की यह आवाज थी कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है उनकी समस्याओं के निवारण के लिए बहुत कुछ किया गया। यह भी भावना थी कि सरकार अत्यंत गरीब और कमजोर वर्गों की देखभाल करने में बहुत समावेशी है। मैं जहां भी गई, वहां से यही आवाज आई कि हम गौरवान्वित करदाता हैं। हम ईमानदार करदाता हैं। हम अच्छे करदाता बनकर देश की सेवा करना जारी रखना चाहते हैं। लेकिन उनका सवाल यह था कि आप हमारे लिए किस तरह की चीजें कर सकते हैं, इसके बारे में आप क्या सोचते हैं?
पीएम के साथ की चर्चा
करदाताओं के इन सवालों के बाद मेरी यह चर्चा प्रधानमंत्री के साथ भी हुई। उन्होंने मुझे यह कार्यभार सौंपा कि आप बजट में क्या लेकर आ सकते हैं। आंकड़ों पर काम किया गया और प्रधानमंत्री को दिखाया गया। यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री को अपने साथ लाने में कितना प्रयास करना पड़ा, सीतारमण ने कहा, ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री बहुत स्पष्ट थे कि वह कुछ करना चाहते हैं। यह मंत्रालय पर निर्भर करता है कि वह विचार करे और फिर प्रस्ताव के साथ आगे बढ़े।
करदाताओं की आवाज सुनी जानी चाहिए
इसलिए, जितना अधिक काम करने की जरूरत थी, बोर्ड को यह समझाने की जरूरत थी कि कर संग्रह में ईमानदार करदाताओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। मंत्रालय और सीबीडीटी को आश्वस्त करने की जरूरत है, क्योंकि उन्हें राजस्व सृजन के बारे में सुनिश्चित होना होगा। तो, वे मुझे समय-समय पर यह याद दिलाने में गलत नहीं थे कि इसका क्या मतलब होगा? लेकिन आखिरकार, हर कोई एक साथ आ गया। प्रधानमंत्री विभिन्न क्षेत्रों के लोगों और उद्योग जगत के नेताओं से मिलते हैं और उनकी आवाज सुनते हैं और उनकी जरूरतों पर प्रतिक्रिया देते हैं।
निरंतर प्रक्रिया है
सीतारमण ने कहा, टैक्स का दायरा बढ़ाने का प्रयास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। बहुत से लोग जो कर की सीमा से बाहर हैं, उन्हें अंदर आने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जो कभी करदाता नहीं रहे हैं या जो अब आय के उस स्तर तक पहुंच गए हैं, या यहां तक कि जो लोग कर भुगतान से बचते हैं, उन सभी को इसमें लाना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग कर भुगतान को समझें। अगले वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च में मामूली वृद्धि पर उन्होंने कहा, खर्च की गुणवत्ता भी देखनी होगी। आंकड़ों पर जाने की जरूरत नहीं है।
डॉलर की मजबूती से कमजोर हुआ रुपया
सीतारमण ने रुपये की गिरावट पर आलोचना खारिज करते हुए कहा, यह केवल मजबूत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, लेकिन अन्य सभी मुद्राओं के मुकाबले स्थिर बना हुआ है। पिछले कुछ महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में 3 प्रतिशत की गिरावट चिंता का विषय है क्योंकि इससे आयात महंगा हो गया है। मुझे चिंता है लेकिन मैं यह आलोचना स्वीकार नहीं करूंगी कि रुपया कमजोर हो रहा है। हमारे व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं। यदि बुनियादी बातें कमजोर होतीं तो रुपया सभी मुद्राओं के मुकाबले स्थिर नहीं होता।