आयकर विभाग ने नोटबंदी से पहले और बाद की आय में भारी अंतर को देखते हुए आयकर रिटर्न के 20, 572 मामलों की जांच का फैसला किया है। आयकर अधिकारियों ने कथित कर चोरी के एक लाख ‘हाई रिस्क’ मामलों की भी पहचान की है।
सूत्रों के मुताबिक 20,572 आयकर रिटर्न में पाया गया है कि नोटबंदी के पहले और बाद के दौर में भारी अंतर है और इसलिए विभाग ने जांच के लिए इन्हें चुना है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ऐसे 17.73 मामलों में 3.68 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी की आशंका है। अधिकारियों ने नोटबंदी के बाद ऐसे मामलों के 23.22 लाख बैंक खातों को जांच के दायरे में रखा है। इनमें से 16.92 लाख बैंक खातों के बारे में अब तक 11.8 लाख लोगों ने ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराई है।