पैराडाइज पेपर्स में में जिन 714 भारतीय कंपनियों और शख्सियतों के नाम उजागर किए गए हैं, उनके खिलाफ जांच की निगरानी वही मल्टी एजेंसी ग्रुप जांच करेगा, जिसे पनामा पेपर्स की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। एजेंसियों के इस समूह को इस मामले में ‘त्वरित कार्रवाई’ करने का भी अधिकार होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को यह जानकारी दी है।
सीबीडीटी के अनुसार आयकर विभाग की देश भर की जांच यूनिटों को सतर्क कर दिया गया है ताकि वे पैराडाइज पेपर्स के खुलासे के आधार पर फौरन कार्रवाई कर सकें। विदेश स्थित कंपनियों के संदिग्ध लेन-देन की पहले से भी जांच चल रही है। जैसे-जैसे नए खुलासे सामने आते जाएंगे, कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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सरकार ने कहा है कि इसके लिए मल्टी एजेंसी ग्रुप का पुनर्गठन किया जाएगा जिसमें सीबीडीटी, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट और रिजर्व बैंक के अधिकारी शामिल हैं। याद रहे कि इस समूह का गठन पिछले साल अप्रैल में पनामा पेपर्स लीक की जांच के लिए किया गया था।
एजेंसियों का समूह सबसे पहले पैराडाइज पेपर्स में शामिल सभी 714 व्यक्तियों और कंपनियों के आयकर रिटर्न की जांच करेगा। इसके बाद केस-दर-केस के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। देश में कमाई गई दौलत को गलत ढंग से विदेश भेजने के मामले में इन व्यक्तियों और कंपनियों की मिलीभगत साबित हुई तो उन्हें नोटिस भी भेजा जाएगा। हालांकि सीबीडीटी ने कहा है कि उसे अभी इस ताजा खुलासे से संबंधित पूरा ब्योरा हासिल नहीं हुआ है। अभी तक उसे मीडिया के जरिए कुछ भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों के बारे में पता चला है।
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सेबी भी करेगा जांच
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने सोमवार को कहा है कि इस मामले की जांच करेगी। इसमें विजय माल्या सहित जिन लोगों और सूचीबद्ध कंपनियों के नाम उजागर किए गए हैं, उनके खिलाफ विदेश में कंपनी खोलकर फंडों की हेरफेर करने और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों के उल्लंघन की जांच की जाएगी।
माल्या की कई कंपनियों के खिलाफ पहले से जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार किसी टैक्स हैवन (जहां टैक्स नहीं वसूली जाता) देश में महज कंपनी खोलना कोई अपराध नहीं है लेकिन उनके बारे में जानकारी छुपाना या उनके जरिए देश से फंड बाहर भेजना गैरकानूनी है। हालांकि इसे साबित करने से पहले सेबी को गहराई से जांच करनी होगी।