सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि यह बहुत अनुचित है कि कोई याचिका दायर कर कहे कि उसे हाईकोर्ट का जज बना दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी को इस आधार पर हाईकोर्ट का जज नहीं बनाया जा सकता कि उसने हाईकोर्ट का जज बनने की इच्छा जाहिर की है।
शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है, जिसमें 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति के प्रस्ताव में यूपी के कुछ न्यायिक अधिकारियों को शामिल नहीं किए जाने को चुनौती दी गई है।
यूपी के न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर नोटिस जारी
चीफ जस्टिस इस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सात न्यायिक अधिकारियों द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के सेकेटरी जनरल, केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता न्यायिक अधिकारियों यह गुहार लगाई है कि कोलेजियम को उनके नामों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
न्यायिक अधिकारियों ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामों पर विचार न करके सिर्फ एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम का प्रस्ताव किया। न्यायिक अधिकारियों ने याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में रिक्त पड़े जजों के पदों का हवाला भी दिया है।