आयकर विभाग के तमिलनाडु निदेशालय की खुफिया और आपराधिक जांच शाखा ने मंगलवार और बुधवार को तिरुचिरापल्ली जिले के उरैयुर में उप-पंजीयक कार्यालय और तिरुवल्लुर जिले के रेडहिल्स में एक अन्य एसआरओ कार्यालय में सर्वे किया।
तमिलनाडु में दो सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों ने पिछले पांच साल में 3,000 करोड़ के संपत्ति के लेनदेन का खुलासा नहीं किया है। आयकर विभाग ने अपने सर्वे के बाद इसे उजागर किया है। जानकारी के मुताबिक,आयकर विभाग के तमिलनाडु निदेशालय की खुफिया और आपराधिक जांच शाखा ने मंगलवार और बुधवार को तिरुचिरापल्ली जिले के उरैयुर में उप-पंजीयक कार्यालय और तिरुवल्लुर जिले के रेडहिल्स में एक अन्य एसआरओ कार्यालय में सर्वे किया।
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सूत्रों ने बताया कि 20 घंटे से अधिक समय तक चली इस कवायद में 20 से अधिक आयकर अधिकारी और आठ सशस्त्र पुलिस कर्मी शामिल थे। आयकर के नियमों के मुताबिक, महानिरीक्षक और उप पंजीयक को 30 लाख से अधिक की अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री के मामले में विभाग को वित्तीय लेनदेन का एक विवरण (एएसएफटी) देना होता है।
सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष के समापन के पूर्व 31 मई तक इसे जमा करना होता है ,लेकिन पिछले पांच सालों से इन दोनों कार्यालयों ने विवरण नहीं सौंपा।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की जांच करना जरुरी हो गया था। इन दोनों कार्यालयों ने दोनों जिलों में एसआरओ एसएफटी की फाइलिंग में इसकी जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु 570 रजिस्ट्रार-उप-रजिस्ट्रार कार्यालय हैं। इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक एसएफटी के गैर-फाइलर हैं।