शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बेतरतीब निर्माण से निपटने के लिए अब मास्टर प्लान बनाने का तरीका बदलने वाला है। इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन सर्वे और डिजिटल नक्शों से शहर के भविष्य की तस्वीर पहले ही देखी जा सकेगी। आखिर इससे शहरों की योजना बनाने में कितना बदलाव आएगा? पढ़िए रिपोर्ट
देश में शहरों के अनियोजित विस्तार से जलभराव, यातायात जाम, सीवेज और बेतरतीब निर्माण की समस्याएं आम हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए अब शहरों के मास्टर प्लान में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन सर्वे और डिजिटल नक्शों की मदद से शहर का खाका तैयार होगा, जिसमें भू-उपयोग से लेकर सड़क, भवन, पानी व सीवेज जैसी जरूरतों को एक साथ देखा जा सकेगा।
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योजना के तहत इसरो के वैज्ञानिकों ने राज्यों के शहरी नियोजन अधिकारियों का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। पहले चरण में चार राज्यों, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय और सिक्किम के 12 अधिकारियों को शहर नियोजन में उपग्रह की मदद से अंतरिक्ष से प्राप्त सूचनाओं और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। आगे अन्य राज्यों के अधिकारी भी प्रशिक्षित किए जाएंगे।
डिजिटल मॉडल में देख सकेंगे शहर का भविष्य
प्रशिक्षण में रिमोट सेंसिंग, जीआईएस व ड्रोन सर्वे का इस्तेमाल सिखाया जा रहा। अधिकारियों को डिजिटल भू-आंकड़ा तैयार करने और उसके आधार पर मास्टर प्लान बनाने की जानकारी दी जा रही है। उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि शहर या उसके किसी हिस्से का डिजिटल मॉडल बनाया जा सकता है। इसके जरिए किसी नए सड़क मार्ग, भवन या दूसरे विकास कार्य का संभावित असर पहले समझने में मदद मिल सकती है।