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मिशन गगनयान: सर्विस मॉड्यूल का सफल परीक्षण, यान की ऊंचाई बनाए रखने में किया जाएगा इसका इस्तेमाल

Thu, 20 Jul 2023 05:37 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेंद्रगिरि (तमिलनाडु)।

सार

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने पिछले महीने कहा था कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ अगस्त के अंत में लॉन्च किया जाएगा, जबकि मानव रहित मिशन अगले साल लॉन्च होगा। 
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इसरो ने गगनयान एसएमपीएस का सफल परीक्षण किया। - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब@ISRO
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विस्तार
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तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने के प्रस्तावित मिशन गगनयान की सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन (एसएमपी) प्रणाली का इसरो ने बुधवार को सफल परीक्षण किया। तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में इसका हॉट-टेस्ट 250 सेकंड चला।

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को बताया कि परीक्षण में 440 न्यूटन थ्रस्ट क्षमता के पांच लिक्विड अपोजी मोटर (एलएएम) इंजनों के साथ 100 न्यूटन थ्रस्ट क्षमता के 16 रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (आरसीएस) थ्रस्टर चलाकर परखे गए। मिशन को अंतरिक्ष में पहुंचाते समय यही एलएएम इंजन यान की मुख्य प्रोपल्शन शक्ति होंगे तो वहीं, आरसीएस थ्रस्टर यान की सही ऊंचाई बनाए रखेंगे। यह एसएमपी प्रणाली इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर ने डिजाइन, विकसित व साकार की है। 

वहीं, सर्विस मॉड्यूल (एसएम) एक बाई-प्रोपेलेंट आधारित प्रोपल्शन प्रणाली है। यह प्रणाली यान को अंतरिक्ष में भेजते समय पृथ्वी के परिक्रमा पथ की कक्षा इकाई, कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया, सक्यूलराइजेशन (यान के कक्षा में प्रवेश का क्षण), परिक्रमा के दौरान नियंत्रण, डी-बूस्ट मनूवर (गति कम करना) और जरूरत में काम आने वाली एसएम आधारित अबोर्ट प्रणाली (खतरे के वक्त अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन बचाने की प्रणाली) के लिए सबसे अहम है। 

 

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दूसरे चरण का पहला हॉट-टेस्ट
परीक्षण के प्रणाली प्रदर्शक मॉडल (एसडीएम) में एसएम के तरल सर्किट की नकल की गई थी। इसमें प्रपलेंट टैंक फीड प्रणाली, हीलियम दबाव अनुकूलन प्रणाली, नियंत्रण कंपोनेंट्स और उड़ान-तरलीकृत थ्रस्टर भी शामिल किए गए। इसरो ने बताया कि मिशन के दूसरे चरण के परीक्षण में यह पहला हॉट-टेस्ट था। एक हॉट-टेस्ट में किसी इंजन को चलाने के लिए जरूरी सभी पक्षों को जांचा जाता है, उनकी क्षमता व यान के साथ उनका समन्वय भी देखा जाता है।

अगस्त में लॉन्च होगा पहला गगनयान मिशन
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने पिछले महीने कहा था कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ अगस्त के अंत में लॉन्च किया जाएगा, जबकि मानव रहित मिशन अगले साल लॉन्च होगा। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में एक कार्यक्रम के मौके पर सोमनाथ ने कहा था कि गगनयान मिशन के लिए हमने एक नया रॉकेट बनाया है जो श्रीहरिकोटा में तैयार है। क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम को जोड़ने का काम शुरू हो गया है। मुझे बताया गया है कि इस महीने के अंत तक यह काम पूरा हो जाएगा और सभी परीक्षण कर लिए जाएंगे।

परियोजना के हिस्से के रूप में ‘कक्षा में मानव रहित मिशन’ अगले साल की शुरुआत में होगा। 2024 की शुरुआत में, हमारे पास कक्षा में मानवरहित मिशन होगा और वहां से इसे सुरक्षित वापस लाना है, जो तीसरा मिशन होगा। वर्तमान में हमने इन तीन मिशनों को निर्धारित किया है।

गगनयान के क्रू सदस्यों की सुरक्षा सबसे अहम चुनौती
सोमनाथ ने कहा था, गगनयान के क्रू सदस्यों की सुरक्षा सबसे अहम है। इसके लिए हम दो अतिरिक्त चीजें कर रहे हैं। पहला, क्रू एस्केप सिस्टम और दूसरा, एकीकृत वाहन स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली। क्रू एस्केप एक पारंपरिक इंजीनियरिंग समाधान है, जिसमें कंप्यूटर पता लगाता है। वहीं, दूसरी प्रणाली अधिक बुद्धिमान है जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के बोर्ड पर निर्णय लेती है।

चंद्रयान-3 चंद्रमा के और पास, चौथी बार बदली कक्षा
दुनिया जब 20 जुलाई को चंद्र दिवस मना रही थी, भारत चंद्रमा के एक कदम और निकट पहुंच गया। हमारे चंद्रयान-3 को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से निकालने के लिए बृहस्पतिवार को चौथी बार परिक्रमा पथ सफलता से बदला गया। इसरो ने बताया कि पृथ्वी से जुड़ी पेरिजी (न्यूनतम निकटता) फायरिंग के लिए परिक्रमा पथ बढ़ा भी दिया गया है। परिक्रमा पथ के बदलाव इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (इसट्रैक) से किए जा रहे हैं। यह यान पृथ्वी की पांच परिक्रमाएं पूरी करने बाद 25 जुलाई को गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकाला जाएगा और चंद्रमा की ओर पर बढ़ चलेगा।  

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