उन्होंने आगे कहा कि जो भी कर्मी भविष्य में अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे उनके लिए ऑक्सीजन सप्लाई, खाने की सप्लाई, मानव मल निर्वहन प्रणाली, वातावरण सिस्टम और कर्मियों की सुरक्षा के लिए क्रू प्रोटेक्शन सिसंटम के साथ भेजा जाएगा। कार्यक्रम के बजट के बारे में सिवान का कहना है कि आज के सफल परीक्षण के बाद अब इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयारी की जाएगी। जिसे बाद में मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष संगठन का आरंभ 1962 में हुआ था। बाद में 1969 में इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) रखा गया। इसरो कभी भी किसी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से नहीं जुड़ा। उसका ध्यान हमेशा से ही सैटेलाइट लॉन्च करने में रहता था ताकि देश की जरूरतें पूरी हो सकें। जिसमें संचार क्षेत्र और पृथ्वी का अवलोकन आदि शामिल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब वह मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में काम कर रहा है।
आज के समय में केवल चीन, रूस और अमेरिका ही ऐसे देश हैं जो मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम हैं। गुरुवार के परीक्षण से ऐसा प्रतीत होता है कि भारत ने भी अब इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है। अभी तो भारत इस कार्यक्रम के तहत परीक्षण कर रहा है लेकिन अगले कुछ सालों बाद भारत का नाम भी ऐसे देशों में शामिल हो जाएगा जो मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेज पा रहे हैं।