इसरो ने शनिवार को इन्फ्लेटेबल एरोडायनामिक डिसेलेरेटर (आईएडी) के साथ एक नई तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो भविष्य के मिशनों में कई एप्लिकेशंस के साथ एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।
इस आईएडी को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) द्वारा डिजाइन और डेवलप किया गया है। थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) से रोहिणी साउंडिंग रॉकेट के साथ इसका सफल परीक्षण किया गया।
शुरुआत में आईएडी को मोड़ा गया और फिर रॉकेट के पेलोड बे के अंदर रखा गया। करीब 84 किलोमीटर की ऊंचाई पर आईएडी को फुलाया गया और यह साउंडिंग रॉकेड के पेलोड पार्ट के साथ वायुमंडल से नीचे उतरा। लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) द्वारा न्यूमेटिक सिस्टम (वायवीय प्रणाली) को डेवलप किया गया था।
आईएडी ने एरोडायनामिक ड्रैग के जरिए पेलोड की वेलोसिटी (वेग) को सिस्टेमैटिकली कम किया। प्रीडिक्टेड ट्रेजेक्टरी (अनुमानित प्रक्षेपवक्र) का पालन किया।
बेंगलुरु स्थित स्पेस एजेंसी ने एक बयान में कहा, "यह पहली बार है जब एक आईएडी को विशेष रूप से खर्च चरण वसूली (Spent Stage Recovery) के लिए डिजाइन किया गया है। मिशन के सभी उद्देश्यों का सफलतापूर्व प्रदर्शन किया गया।"
स्पेस एजेंसी ने कहा, स्पेस एप्लिकेशंस के विभिन्न प्रकारों में आईएडी में मंगल या शुक्र पर पेलोड उतारने, ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन के लिए आवास बनाने जैसी अपार संभावनाएं हैं।
रोहिणी साउंडिंग रॉकेटों का इस्तेमाल भारत और विदेश के वैज्ञानिकों द्वारा फ्लाइट डेमोंस्ट्रेशन के लिए नियमित रूप से किया जाता है।
इसरो ने कहा, आज की फ्लाइट में आईएडी के साथ माइक्रो वीडियो इमेजिंग सिस्टम, रेडियो टेलीमेट्री ट्रांसमीटर, एमईएमएस आधारित साउंडिंग सेंसर और कई नई मैथोलॉजी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। बयान में कहा गया, इन्हें बाद के प्रमुख मिशनों में शामिल किया जाएगा। साउंडिंग रॉकेड ऊपरी वायुमंडल में एक रोमांचक मंच प्रदान करते हैं।