भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के लिए एक और बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने 3 जुलाई को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित अपने प्रपल्शन कॉम्प्लेक्स में गगनयान सेवा मॉड्यूल प्रप्लशन प्रणाली (एसएमपीएस) के दो 'हॉट टेस्ट' सफलतापूर्वक पूरे किए। इन परीक्षणों की अवधि एक बार 30 सेकंड और दूसरी बार 100 सेकंड रही। इनका उद्देश्य यह था कि गगनयान के लिए तैयार की जा रही प्रणाली की संरचना और कार्यक्षमता की जांच की जा सके। यह परीक्षण गगनयान मिशन की तैयारी का एक अहम हिस्सा था, जिससे यह साबित हुआ कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान प्रप्लशन प्रणाली सही ढंग से काम करेगी। यह सफलता भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की ओर एक और मजबूत कदम है।
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लिक्विड प्रपल्शन सिस्टम सेंटर ने किया विकसित
इसरो ने बताया, 'प्रणाली का कुल प्रदर्शन परीक्षण से पहले लगाए अनुमान के अनुसार पूरी तरह सामान्य रहा। 100 सेकंड के लंबे परीक्षण में सभी रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (आरसीएस) थ्रस्टर्स को अलग-अलग तरीकों से (लगातार चलाना और रुक-रुक कर चलाना) सफलतापूर्वक चलाया गया। साथ ही सभी लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) इंजन भी साथ में सक्रिय किए गए।' गगनयान की इस प्रप्लशन प्रणाली को इसरो के लिक्विड प्रपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) ने विकसित किया है। यह प्रणाली बहुत अहम है क्योंकि इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष यान को कक्षा में सही ढंग से घुमाने और किसी आपात स्थिति में मिशन को बीच में रोकने के लिए किया जाता है।
परीक्षण से मिली कई अहम जानकारियां
इस प्रणाली में कुल पांच एलएएम इंजन (प्रत्येक की ताकत 440 न्यूटन) और 16 आरसीएस थ्रस्टर (प्रत्येक की ताकत 100 न्यूटन) शामिल हैं। इन हॉट टेस्ट के दौरान पहले किए गए परीक्षणों से मिली जानकारी के आधार पर इसमें कुछ सुधार भी किए गए ताकि वास्तविक उड़ान जैसी स्थिति को ज्यादा बेहतर ढंग से दोहराया जा सके।
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अब ‘फुल ड्यूरेशन हॉट टेस्ट’ करेगा इसरो
इसरो ने कहा कि इन सफल परीक्षणों से मिली आत्मविश्वास के साथ अब वह जल्द ही इस प्रणाली का एक ‘फुल ड्यूरेशन हॉट टेस्ट’ यानी पूर्ण अवधि का परीक्षण भी करेगा। गौरतलब है कि गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारत की यह क्षमता साबित करना है कि वह इंसानों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेज सकता है। इस मिशन से मिलने वाला अनुभव भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी बेहद अहम होगा।