इसरो का PSLV-C61 मिशन असफल
- फोटो : X @isro
ISRO के प्रमुख वी. नारायणन ने लॉन्च के लाइव प्रसारण के दौरान बताया, 'रॉकेट के तीसरे चरण में ठोस ईंधन से चलने वाला मोटर चालू तो हुआ, लेकिन उसके दबाव में गिरावट आ गई। इसी कारण मिशन को पूरा नहीं किया जा सका।'
इसके बाद इसरो ने कहा है कि एक फेल्योर एनालिसिस कमेटी बनाई जाएगी, जो पूरी उड़ान की जानकारी और आंकड़ों की जांच करेगी। इसके बाद ही असफलता की असली वजह साफ हो पाएगी और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के उपाय किए जाएंगे।
पीएसएलवी रॉकेट के चरण कैसे काम करते हैं?
पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) एक चार-चरणीय रॉकेट होता है:
- पहला और तीसरा चरण – ठोस ईंधन से चलते हैं
- दूसरा और चौथा चरण – तरल ईंधन से चलते हैं
- तीसरा चरण सैटेलाइट को ऊपरी वायुमंडल में सही कक्षा की दिशा में ले जाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसी चरण में गड़बड़ी आई और सैटेलाइट तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया।
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यहां फेल हुआ इसरो का PSLV-C61 मिशन
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पहले भी हुई हैं ऐसी गड़बड़ियां
हालांकि पीएसएलवी की गिनती दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेटों में होती है, लेकिन पहले भी कुछ मिशन असफल रहे हैं:
- 1993 में पहले पीएसएलवी मिशन के दौरान प्रोग्रामिंग गलती और चरण पृथक्करण में गड़बड़ी हुई थी, जिससे सैटेलाइट गलत दिशा में चला गया था।
- 2017 में एक पीएसएलवी मिशन के दौरान सैटेलाइट का कवच नहीं खुला, जिससे सैटेलाइट अंदर ही फंसा रह गया था।
क्या पीएसएलवी अब भरोसेमंद नहीं रहा?
इसरो के पीएसएलवी रॉकेट ने अब तक 60 से ज्यादा सफल उड़ानें भरी हैं और कई देशों के सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचाए हैं। यह रॉकेट इसरो का एक मजबूत स्तंभ रहा है। वहीं इसकी इस असफलता को लेकर जानकारों का मानना है कि, एक-दो असफलताओं से पीएसएलवी रॉकेट की साख पर बट्टा नहीं लगेगा।