इसरो ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) की मदद से विकसित किए गए सैन्य सैटेलाइट एमिसैट को अंतरिक्ष में स्थापित कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की। इस सैटेलाइट की अहमियत के बारे में इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके बारे में सरकार और इसरो ने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है।
सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत सिग्नल को पकड़ना है। इसमें जमीन से सैकड़ों किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए जमीन पर संचार प्रणालियों, रडार और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों से निकलने वाले सिग्नल को पकड़ना है। जासूसी सैटेलाइट एमिसैट जमीन पर स्थित बर्फीली घाटियों, बारिश, तटीय इलाकों, जंगल और समुद्री की लहरों को बहुत आसानी नापने की क्षमता रखता है।
इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भारतीय ‘जासूस’ बताया जा रहा है जो पड़ोसी देशों के साथ ही दुश्मन देशों पर नजर रखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सैटेलाइट इस्राइल के जासूसी सैटेलाइट ‘सरल’ पर आधारित है। ये दोनों ही सैटेलाइट एसएसबी-2 प्रोटोकॉल का पालन करते हैं। यह प्रोटोकॉल भारत जैसे बड़े देश में इलेक्ट्रानिक निगरानी क्षमता के लिए बेहद अहम है।
इस सैटेलाइट में रडार की ऊंचाई मापने वाला डिवाइस एल्टिका लगा है। इसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट ‘कौटिल्य’ के तहत विकसित किया गया है।