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सैकड़ों किमी ऊंचाई से जमीन की गतिविधियों पर नजर रखेगा एमिसैट

Tue, 02 Apr 2019 03:45 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)
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इसरो - फोटो : SELF
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इसरो ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) की मदद से विकसित किए गए सैन्य सैटेलाइट एमिसैट को अंतरिक्ष में स्थापित कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की। इस सैटेलाइट की अहमियत के बारे में इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके बारे में सरकार और इसरो ने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। 

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सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत सिग्नल को पकड़ना है। इसमें जमीन से सैकड़ों किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए जमीन पर संचार प्रणालियों, रडार और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों से निकलने वाले सिग्नल को पकड़ना है। जासूसी सैटेलाइट एमिसैट जमीन पर स्थित बर्फीली घाटियों, बारिश, तटीय इलाकों, जंगल और समुद्री की लहरों को बहुत आसानी नापने की क्षमता रखता है।

इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भारतीय ‘जासूस’ बताया जा रहा है जो पड़ोसी देशों के साथ ही दुश्मन देशों पर नजर रखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सैटेलाइट इस्राइल के जासूसी सैटेलाइट ‘सरल’ पर आधारित है। ये दोनों ही सैटेलाइट एसएसबी-2 प्रोटोकॉल का पालन करते हैं। यह प्रोटोकॉल भारत जैसे बड़े देश में इलेक्ट्रानिक निगरानी क्षमता के लिए बेहद अहम है।
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इस सैटेलाइट में रडार की ऊंचाई मापने वाला डिवाइस एल्टिका लगा है। इसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट ‘कौटिल्य’ के तहत विकसित किया गया है। 

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चीन और पाकिस्तान के खतरे से निपटेगा

इसरो ने हाल ही में 300 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में एक लाइव सैटेलाइट को मात्र 3 मिनट में मिसाइल से नष्ट कर दिया था। इसके जरिए भारत ने चीन और पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया था कि वह अंतरिक्ष में किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में अब सक्षम है। एमिसैट सैटेलाइट के जरिए भारत ने और ताकत हासिल कर ली है। युद्ध में यह बहुत जरूरी होता है कि दुश्मन देश के रडार को खोजकर उसे नष्ट करना ताकि हवाई हमले के वक्त एयर डिफेंस सिस्टम उसके विमानों को निशाना न बना सकें। एमिसैट इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता है। यह चीन और पाकिस्तान में चल रही गतिविधियों पर भी निगरानी रखने में सक्षम है। साथ ही तटीय क्षेत्रों में नजर रखना और आसान हो जाएगा।   

चाणक्य के विचार से मिली प्रेरणा

इसरो ने अपने प्रोजेक्ट कौटिल्य पर काम मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के सलाहकार आचार्य चाणक्य के विचार से प्रेरित होकर शुरू किया था। चाणक्य का कहना था कि किसी भी विशाल देश में सफलतापूर्वक शासन करने के लिए गुप्तचरों का प्रभावी नेटवर्क बहुत जरूरी होता है। गुप्तचर किसी भी राजा के आंख और कान होते हैं। ये आंतरिक निगरानी और युद्ध के समय बेहद अहम होते हैं। करीब 8 साल की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने एमिसैट को विकसित करने में सफलता हासिल की। 
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