इसरो प्रमुख वी नारायणन ने कहा कि इसरो के पास 56 सक्रिय सैटेलाइट्स है,जिसमें अधिकतर देश की सीमाओं की निगरानी और जनता की भलाई के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसरो की तकनीकें आम जनता के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं। इसरो टेली-कम्युनिकेशन, टेली-एजुकेशन, आपदा चेतावनी जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी नारायणन ने बुधवार को आने वाले समय में इसरो की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसरो देश की सुरक्षा, खासकर जमीनी और समुद्री सीमाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि इसरो के पास फिलहाल 56 सक्रिय सैटेलाइट हैं, जिनमें से कई सैटेलाइट देश की सुरक्षा में काम आ रहे हैं। नारायणन ने कहा कि हमारे देश की समुद्री सीमा करीब 11,500 किलोमीटर लंबी है। उस पूरे क्षेत्र पर निगरानी रखना जरूरी है, साथ ही जमीनी सीमाओं की भी सुरक्षा करनी है। इसरो इन सभी दिशा में हर संभव कदम उठा रहा है।
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'इसरो की तकनीकें आम जनता के लिए अहम'
इसरो प्रमुख ने कहा कि इसरो की तकनीकें आम जनता के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं। इसरो टेली-कम्युनिकेशन, टेली-एजुकेशन, आपदा चेतावनी और राहत, मौसम पूर्वानुमान, जल और खाद्य सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रहा है। साथ ही जब उनसे ऑपरेशन सिंदूर में ISRO की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम जो जरूरी है, वही कर रहे हैं। कृपया विशिष्ट सवाल न करें। बता दें कि इसरो प्रमुख ने यह बातें भुवनेश्वर स्थित सेंट्रल टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर (सीटीटीसी) के दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
नारायणन ने भारत के चंद्रयान-4 और पांच की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसरो अब चंद्रयान-4 पर काम कर रहा है, जो चंद्रमा से नमूने लेकर वापस धरती पर लाने वाला मिशन होगा। इससे चंद्रमा की सतह और भूगर्भ को समझने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, भारत और जापान मिलकर चंद्रयान-5 पर भी काम कर रहे हैं। यह मिशन चंद्रयान-3 से काफी बड़ा और एडवांस होगा। इसकी कुल लॉन्च वजन 6,400 किलो होगा, जबकि चंद्रयान-3 का वजन 5,000 किलो था। नया रोवर 350 किलो का होगा और यह 100 दिनों तक चंद्रमा की सतह की जांच करेगा, जबकि पहले का रोवर केवल 14 दिन तक काम करता था।
गगनयान और नासा के साथ मिशन
नारायणन ने अंत में गगनयान की तैयारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन पर भी काम तेजी से चल रहा है। इसका पहला बिना इंसान वाला मिशन इसी साल लॉन्च होगा। इसके बाद 2027 की पहली तिमाही में दो इंसानी मिशन भेजे जाएंगे। इसरो दो मिशनों में नासा के साथ भी साझेदारी कर रहा है।