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गगनयान मिशन: अंतरिक्ष में पहले तीन बार खाली जहाज भेजेगा ISRO, चेयरमैन नारायणन ने बताया भारत का मेगा प्लान

Wed, 08 Apr 2026 05:00 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

इसरो चेयरमैन वी नारायणन ने कहा कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' से पहले तीन परीक्षण मिशन भेजे जाएंगे। बंगलूरू में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने बताया कि मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'ह्यूमन रेटिंग' और 'क्रू एस्केप सिस्टम' जैसी तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है। 
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गगनयान मिशन की तैयारी - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी नारायणन ने बुधवार को कहा कि अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने से पहले इसरो पूरी सावधानी बरत रहा है। उन्होंने बताया कि वास्तविक मिशन से पहले तीन 'अनक्रूड' यानी, बिना चालक दल वाले मिशनों को अंजाम दिया जाएगा।
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पीएम मोदी के विजन पर काम जारी
बंगलूरू में 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस' के उद्घाटन के दौरान इसरो चीफ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए निर्देशों के आधार पर हम गगनयान कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहे हैं। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले हमारा लक्ष्य तीन मानवरहित मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पहले बिना चालक दल वाले मिशन पर काम चल रहा है। अब तक की सभी गतिविधियां योजना के मुताबिक सही दिशा में जा रही हैं।

क्यों है मिशन ऑपरेशंस सबसे बड़ी चुनौती?
इसरो प्रमुख ने अंतरिक्ष मिशनों में 'मिशन ऑपरेशंस' की अहमियत पर जोर देते हुए एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि लॉन्च व्हीकल यानी, रॉकेट का काम तो महज 20-25 मिनट का होता है, लेकिन असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है।
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अगर कोई संचार उपग्रह 15 साल के लिए भेजा गया है, तो मिशन ऑपरेशंस टीम को लगातार 15 साल तक उस पर नजर रखनी होती है। उन्होंने कहा कि मंगलयान मिशन की सफलता के लिए टीम को लगातार 300 दिनों तक मिशन ऑपरेशंस पर काम करना पड़ा था। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने वाले मिशन में यह काम और भी क्रिटिकल हो जाता है क्योंकि यहां मशीन और सॉफ्टवेयर के साथ इंसान की सुरक्षा का तालमेल बिठाना होता है।

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पहली बार हो रहे हैं ये बड़े बदलाव
चेयरमैन नारायणन ने कहा कि गगनयान के लिए रॉकेट की 'ह्यूमन रेटिंग' यानी, इंसानों के लिए सुरक्षित बनाना की जा रही है। इसके अलावा 'क्रू एस्केप सिस्टम' और 'एनवायरमेंटल कंट्रोल सेफ्टी सिस्टम' जैसी नई तकनीकें विकसित की जा रही हैं, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को हर हाल में सुरक्षित रखा जा सके।

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