भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हिजाब विवाद पर इस्लामिक देशों के संगठन को जवाब दिया।
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इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद को लेकर टिप्पणी की है। संगठन ने भारत को नसीहत देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हिंदुस्तान मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा के साथ उनके हितों का ख्याल रखेगा। साथ ही वह इस्लाम को मानने वाले लोगों की जीवनशैली की रक्षा करे। हालांकि, ओआईसी के इस बयान पर भारत ने भी करारा जवाब दिया है।
क्या है ओआईसी का पूरा बयान?
ओआईसी ने अपने ट्विटर हैंडल से हिजाब विवाद के अलावा हरिद्वारा में हुई धर्म संसद को लेकर भी चिंता जताई। पोस्ट में कहा गया, " 'ओआईसी मांग करता है कि भारत मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा करे और उनके हितों का ख्याल रखे। इस्लाम को मानने वाले लोगों की जीवनशैली की रक्षा करे। इसके अलावा हिंसा के लिए उकसाने वाले लोगों और हेट क्राइम (नफरत वाले अपराध) करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।"
इतना ही नहीं ओआईसी ने हरिद्वार की धर्म संसद को लेकर लिखा, "हम हाल ही में उत्तराखंड के हरिद्वार में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ की गई टिप्पणी पर चिंता जाहिर करते हैं।" संगठन ने इस मामले में भी भारत से तुरंत और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भारत की तरफ से क्या जवाब आया?
भारत की तरफ से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ओआईसी पर जबरदस्त पलटवार किया। उन्होंने कहा- "भारत में सभी धर्मों के लोग खुशी के साथ रह रहे हैं। अंदरुनी मामलों में किसी को भी भारत को उपदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने ओआईसी से सवालिया अंदाज में पूछा कि क्या कोई लड़की पाकिस्तान में इस तरह जय श्रीराम का नारा लगा सकती है। नकवी ने कहा, "पाकिस्तान में कोई लड़की जय श्रीराम का नारा लगा देती तो उसका तो सिर ही कलम कर दिया जाता।"
विदेश मंत्रालय बोला- ओआईसी ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया
इस बीच विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर ओआईसी पर निशाना साधा। प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने भारत से संबंधित मामलों पर ओआईसी के महासचिव के एक और प्रेरित और भ्रामक बयान पर गौर किया है। भारत में मुद्दों को हमारे संवैधानिक ढांचे और तंत्र के साथ-साथ लोकतांत्रिक लोकाचार और राजनीति के अनुसार माना और हल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि ओआईसी सचिवालय की सांप्रदायिक मानसिकता इन वास्तविकताओं की उचित सराहना की अनुमति नहीं देती है। भारत के खिलाफ अपने नापाक प्रचार को आगे बढ़ाने के लिए निहित स्वार्थों द्वारा ओआईसी का अपहरण जारी है। नतीजतन, इसने केवल अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।