सुप्रीम कोर्ट आज से इस बात पर बात पर सुनवाई करेगा कि निजता का अधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल होगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। जो यह तो तय करेगा कि नागरिक अपनी निजता को कितना आनंद उठा सकते हैं, साथ ही वह निजता कहां खत्म होती है इस सीमा को भी तय कर सकता है। मौजूदा समय में न ही संविधान में और न किसी कानून में निजता को मौलिक अधिकार में माना गया है।
सुनावई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि निजता को मानव जीवन और स्वतंत्रता के सभी प्रक्रियाओं में स्थान दिया गया है।
Aadhar matter: Petitioner's lawyer tells SC's constitution bench that privacy is embedded in all processes of human life & liberty.— ANI (@ANI_news) July 19, 2017
मंगलवार को मुख्य न्यायधिश जेएस खेहर वाली पांच जज की पीठ ने कहा कि यह हमारे लिए जरूरी है कि हम इस बात पर विचार करें कि भारत के संविधान में नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकार में निजता को लेकर कोई अधिकार है या नहीं। आज इस मुद्दे पर नौ जज की एक पीठ चर्चा करेगी।
बता दें कि केंद्र सरकार के आधार को पैन कार्ड से लिंक करने के आदेश के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थी। इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने आधार योजना की वैधता को चुनौती देने के साथ निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
पहले से गठित पांच सदस्य वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधानिक पीठ में मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायाधीश जे चेमलेश्वर, एमए बोब्दे, डीआई चंद्रचूड़ और एस अब्दुल नजीर हैं। इस महीने की 12 तारीख को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और वरिष्ठ वकील श्याम दीवान द्वारा संयुक्त रूप से मामलों को उठाने के बाद आधार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट एक पीठ बनाने पर सहमत हुआ था।
ये दोनों वकील उन याचिकाओं के संबंध में पेश हुए थे जिनमें विभिन्न जनहित योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने के सरकार के कदम को चुनौती दी गई है।