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चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव कहीं एक राजनीतिक गेमबॉल तो नहीं?

Fri, 20 Apr 2018 09:51 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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dipak mishra
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कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस नोटिस को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के नेता भी इसे लेकर दो धड़े में बंट गए हैं। कुछ नेताओं को इससे आपत्ति है। पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी महाभियोग के नोटिस से सहमत नहीं हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस, राजद, तेलगू देशम पार्टी, जद(बीजू), एआईएडीएमके, डीएमके, टीआरएस ने प्रस्ताव से दूरी बनाई है।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस शुरू में इस प्रस्ताव के समर्थन में थी लेकिन बाद में किनारा कर लिया। पूरा विपक्ष साथ नहीं है। वहीं कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किया है। मसलन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, वीरप्पा मोइली के हस्ताक्षर नहीं हैं।

कांग्रेस पार्टी के कुल 51 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत किया है। 71 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह प्रस्ताव सभापति को सौंपा गया है। इसमें से सात सांसद ऐसे हैं जिनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी के भीतर कई नेताओं को महाभियोग लाने का प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है। 
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क्या है कारण

विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग के प्रस्ताव में मुख्य न्यायाधीश पर कदाचार (भ्रष्टाचार) का कोई आरोप नहीं है। पांच आरोप लगाए गए हैं और सभी आरोप पद के दुरुपयोग से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस ने महाभियोग प्रस्ताव लाने के मूल कारण में उच्चतम न्यायालय के चार जजों की प्रेस वार्ता का हवाला दिया है। इस प्रेस वार्ता में चारों जजों ने भी उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर पद के दुरुपयोग का ही आरोप लगाया था। इसे उन्होंने न्यायपालिका की परंपरा, स्वतंत्रता तथा मूल्यों के खिलाफ बताया था।

उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि जितना अभी तक उन्होंने समाचार और टीवी चैनल पर पढ़ा और देखा है, वह महाभियोग जैसे कदम के लिए कहीं से सही नहीं ठहराया जा सकता। यह केवल एक राजनीतिक प्रयास भर है।

राजनीतिक गेमबॉल

विपक्ष के महाभियोग के प्रस्ताव को भाजपा के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली बदले की भावना से लाया गया राजनीतिक हथियार मान रहे हैं। विपक्षी पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि वह इससे सहमत नहीं थे। महाभियोग का प्रस्ताव देने के लिए उनसे भी संपर्क किया गया था, लेकिन वह न्यायपालिका की गरिमा को देखते हुए इसके लिए तैयार नहीं हुए। प्रस्ताव के स्वीकार होने के बाद संसद में पार्टी के रुख के बारे में पूछे जाने पर सूत्र का कहना है कि जब यह स्थिति आएगी तो देखा जाएगा। 

समझा जा रहा है कि यह कांग्रेस पार्टी और छह विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा लाया गया राजनीतिक गेमबॉल है। इसके पीछे कर्नाटक विधानसभा के चुनाव, जस्टिस लोया की रहस्यमय परिस्थिति में हुई मौत को लेकर राजनीतिक दबाव के रुप में देखा जा रहा है। यह देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के ऊपर भी एक नैतिक दबाव बनाने के रूप में भी देखा जा रहा है।
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