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'आयरन लेडी' इरोम ने कैसे काटे भूख हड़ताल के 16 साल

Thu, 11 Aug 2016 06:56 AM IST
एजेंसी/ इंफाल
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मणिपुर की ‘लौह महिला’ इरोम शर्मिला का स्वास्थ्य आज सोलह साल की भूख हड़ताल के बावजूद पूरी तरह दुरुस्त है। इसका राज उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और योग करने की आदत है। भूख हड़ताल के दौरान उन्हें जबरन नाक से आहार दिया जाता था इसके बावजूद वह नियमित रूप से योग करती थीं। इरोम ने मंगलवार को अपनी भूख हड़ताल समाप्त की।
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उनके सहयोगी और परिवार के सदस्यों के अनुसार, भूख हड़ताल पर जाने से दो साल पहले 1998 में इरोम ने योग सीखा था। उनके भाई सिंहजीत ने कहा, ‘अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और नियमित योग की बदौलत ही वह शारीरिक रूप से फिट हैं।’ नब्बे के दशक में युवा रहीं इरोम को प्राकृतिक चिकित्सा के विषय ने बहुत प्रभावित किया। उन्होंने इससे जुड़ा कोर्स भी किया। इसमें प्राकृतिक उपचार के माध्यम के रूप में योग भी शामिल था।

इरोम ने अपनी जीवनी लिखने वाली दीप्ति प्रिया महरोत्रा को किताब ‘बर्निंग ब्राइट’ के लिए बताया था, ‘योग फुटबॉल जैसा नहीं है। यह भिन्न है। यदि कोई व्यक्ति योग करता है तो यह उसे दीर्घायु बनाने में मदद कर सकता है। योग करके आप सौ साल तक जी सकते हैं। फुटबॉल जैसे अन्य खेलों के साथ ऐसा नहीं है।’ उन्होंने याद किया कि उन्होंने 1998-99 में योगासन करना शुरू किया और तब से यह उनकी दिनचर्या में शामिल है।
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भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद भी अपने प्रण पर कायम हैं 
अपनी भूख हड़ताल मंगलवार को समाप्त करने वाली इरोम शर्मिला अब भी अफस्पा हटाए जाने के अपने प्रण पर कायम हैं। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा बरकरार रखी है कि जब तक इसे नहीं हटाया जाएगा तब तक वह न नाखून काटेंगी, न बालों में कंघी करेंगी और न घर जाकर अपनी मां से मिलेंगी।

5 नवंबर 2000 को उन्होंने प्रण किया था कि जब तक सरकार अफस्पा नहीं हटाती है तब तक वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहेंगी। उनके विरोध प्रदर्शन के विभिन्न आयाम रहे जो खाना या पानी न लेने के परे भी जा चुके थे।

इनमें सबसे अधिक कठिन था अफस्पा हटाने का लक्ष्य नहीं प्राप्त होने तक उनका अपने घर न जाना और अपनी 84 साल की मां सखी देवी से नहीं मिलना। 16 वर्षों के दौरान इरोम एक बार भी इंफाल शहर से सटे कोंगपल कोंगखम लिकाई अपने घर नहीं गईं।

शहद चख कर मंगलवार को अपना हड़ताल समाप्त करने वाली 44 वर्षीय ‘सत्याग्रही’ इरोम ने स्पष्ट कहा है कि जब तक अफस्पा समाप्त नहीं हो जाता तब तक वह अपने घर नहीं जाएंगी। उन्होंने आश्रम में रहना तय किया है। उनके बड़े भाई सिंहजीत ने कहा कि उनकी मां अपनी बेटी की जीत का इंतजार कर रही हैं।
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16 साल में सिर्फ एक बार अपनी मां से मिलीं 

पिछले 16 वर्षो के दौरान जब इरोम की मां को जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और इरोम को नाक की नली के जरिये जबरन तरल पदार्थ देने के लिए हॉस्पिटल लाया गया था, तब दोनों की सिर्फ एक बार मुलाकात हुई थी।

सिंहजीत ने बताया कि 2009 में सखी देवी को दमा का दौरा पड़ा था और वह बेहोश हो गई थीं। उन्होंने कहा, ‘शर्मिला को लगा की मां की मौत हो गई और वह आधी रात को अपनी मां के वार्ड में पहुंचीं। जब वह मां के चेहरे के काफी करीब आईं तो अचानक मां होश में आ गईं।

लेकिन मां ने उसे तत्काल वापस जाने को कहा।’ इरोम आज्ञाकारी बच्चे की तरह वहां से वापस चली गई। मां ने कहा कि जीतने के बाद मेरे पास आना। मुझे इंतजार रहेगा कि तुम घर आकर मेरे लिए खाना पकाओगी।

डॉक्टरों की देखरेख में तरल आहार ले रही हैं
इरोम अभी जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों की देखरेख में हैं। उन्हें तरल आहार दिया जा रहा है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि इतने वर्षों से भूख हड़ताल के दौरान वह अपने डॉक्टरों की देखरेख में थीं। वह अचानक ठोस आहार लेने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें कुछ दिन और हॉस्पिटल में रखना होगा।

कड़ी सुरक्षा में हैं इरोम
कुछ उग्रवादी समूहों द्वारा इरोम की भूख हड़ताल समाप्त करने के विरोध को देखते हुए उन्हें बुधवार से कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। इससे पहले इरोम ने कहा था कि भूख हड़ताल समाप्त करने के उनके निर्णय को गलत समझा गया है। फिलहाल, वह विशेष तरल आहार पर जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के डॉक्टरों की देखरेख में हैं। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, इरोम पर खतरे के मद्देनजर हॉस्पिटल के परिसर में सशस्त्र पुलिस कर्मी तैनात हैं।
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