इराक में भारतीयों की मौत के बाद बिलखते परिजन
इराक में आतंकियों के हाथों मारे गए 39 परिजनों के शवों को भारत आने में अभी कम से कम दस दिन का वक्त लग सकता है। वहीं परिवार वाले जो पिछले चार साल से रोजाना दरवाजे का रास्ता देखते थक जाते थे, अब उनको शवों का इंतजार है। तमाम कानूनी प्रक्रिया को पूरी होने में दस दिन का वक्त लग सकता है और ऐसे में अगले दस दिन तक घरों में शोक पसरा रहेगा।
केंद्र सरकार की तरफ से इराक सरकार को पुख्ता सुबूत सौंपे जाएंगे कि मरने वाले 39 भारतीय हैं और इसके बाद शवों की पैकिंग कर भारत सरकार को सौंपे जाएंगे और बाद में इनको भारत लाकर उनके परिवार वालों को सौंपा जाएगा। केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह कह चुके हैं कि इस प्रक्रिया में दस दिन का वक्त लग सकता है। लेकिन परिवार वालों को यह दस दिन भी दस साल के बराबर महसूस हो रहे हैं। वहीं परिवार वालों ने सरकार से मांग की है कि हालात को देखते हुए शवों को जल्दी भारत लाने की व्यवस्था की जाए।
नकोदर के निकट गांव अलेवाल में मामा-भांजे के शव एक साथ गांव में आएंगे। मामा नंद लाल व उसका भांजा संदीप दोनों ही इराक में थे और दोनों को आईएस ने मार दिया था। गांव अलेवाल का रहने वाला संदीप कुमार 2012 में इराक गया था, जहां पर वह अपने मामा नंद लाल के पास रह रहा था। सुमित्रा देवी के भाई नंद लाल व बेटे संदीप के शवों को जल्दी भारत लाने की मांग की है। नकोदर नगर काउंसिल के प्रधान आदित्य भटारा मनु का कहना है कि आगे ही परिवार वालों का पल पल गुजारना मुश्किल हो चुका है, जो जख्म चार साल पहले हुआ था, आज वह फूटा है। उनका दर्द समझना चाहिए और जल्द से जल्द शवों को भारत लाकर उनकी अंतिम रस्म करनी चाहिए।