ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी भारत के दौरे पर गुरुवार को हैदराबाद पहुंचे। उनके इस दौरे को दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सूत्रों की मानें तो अपने इस दौरे में रूहानी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह की चाबी भारत को सौंप सकते हैं। यह बंदरगाह भारत और ईरान के रिश्तों की एक सफल दास्तां है। इस बंदरगाह पर काफी सक्रियता देखने को मिलती है। रिपोर्ट्स के अनुसार कराची से चाबहार की तरफ ट्रैफिक को मोड़ दिया गया है।
गुरुवार शाम को रूहानी हैदराबाद पहुंचे। उन्हें राज्य में एक रिसेप्शन दिया जाएगा इसके बाद वह शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध की वजह से वह बैंकिंग क्षेत्र में परेशानियों से जूझ रहा है। इसी वजह से भारत पहली बार ईरान में रुपए निवेश करने के लिए तैयार हो गया है। सूत्रों ने बताया कि यह खास तरह का इंतजाम पहले केवल भूटान और नेपाल के लिए किया गया था।
तेहरान पर लगे प्रतिबंध की वजह से ईरान में विदेशी मुद्रा का लेन-देन करना और निवेश करना काफी मुश्किल है। सूत्र ने कहा- भारत ने रुपए में निवेश करने की मंजूरी दे दी है। रूहानी का स्वागत केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह और तेलंगाना व आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने बेगमपट एयरपोर्ट पर किया। शुक्रवार को ईरानी राष्ट्रपति हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करेंगे। इसके बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।